Natural resources-प्राकृतिक साधन

By | 29th October 2018
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Natural resources-प्राकृतिक साधन
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Natural resources-प्राकृतिक साधन


Natural resources-प्राकृतिक साधन – ऐसी सुविधाएं जो हमें कुदरती रूप से फायदें देती हैं। जिन्हे हम अपने आप पास फैली वनस्पति से प्राप्त क्र सकते हैं। 

क्या है प्राकृतिक साधन(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

जल ,वायु , अगनि , मृदा , प्रकाश , वनस्पति , पर्वत , मित्र किट ये सब प्राकृतिक साधन है। 

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

कौन से प्राकृतिक साधन आते थे काम किसान के

जल :- जल किसान और कृषि के लिए अति आवश्यक प्रकृतिक साधन रहा है। जल के बिना फसल उगाना नामुमकिन है। जल एक ऐसा प्राकृतिक साधन है जिसको मानव स्वयं नहीं बना सकता। पृथ्वी के 75 % भाग पर जल ही जल है।

बाकि का बचा 25 % भाग मानव के रहने की जगह, कृषि के लिए, पर्वतों के लिए, वनस्पति के लिए है। जल एक द्रव्य पदार्थ होता है जिसे हम देख सकते है, छू सकते है और पी सकते हैं। जल एक पारदर्शी द्रव्य पदार्थ है।

you know जल में बहुत सारे गुण होते है जो मानव शरीर के साथ साथ फसल ,अन्य प्राकृतिक वनस्पति और सभी जीवों के लिए अनिवार्य है।

जल के प्राप्ति स्त्रोत :- जल को पृथ्वी पर भूमिगत रूप से नदियों के द्वारा पर्वतों से गिरते झरनो और आकाश से बरसात  के द्वारा  प्राप्त  किया जा सकता है। 

जल किसान की कृषि में कैसे मदद करता है(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

है जल तो नाम से एक द्रव्य पदार्थ लेकिन जल की हर वस्तु हर जीव को अति आवश्यक्ता है जल के बिना सब कुछ निरार्थ हो जाता है। अब मानव शरीर को ही देखलो मानव शरीर के 75 फीसदी हिस्से में जल का ही अहम स्थान है।

अगर कोई इंसान जल का प्रयोग करना छोड़ दे तो वो कुछ समय तक ही जीवित रह सकता है ठीक इसी प्रकार कृषि में फसल को भी जल चाहिए अगर जल न मिले तो हम एक बीज को भी अंकुरित नहीं कर सकते। फसल को दरुस्त रखने के लिए सही खनिज पदार्थ पोधो के तनो में पहुंचाने के लिए जल अति आवश्यक है।

इसलिए कृषि के क्षेत्र में भी जल को अहम स्थान प्राप्त है। सिंचाई का नाम दिया गया है इस स्थान को।

क्या थे सिंचाई के साधन

मशीनीकरण से पहलेकिसान केपास वर्षा और नदियां सिंचाई के लिए प्राकृतिक साधन थे। ये दो साधन सिंचाई में कैसे काम आते थे।  आइये जान लेते है। 

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

नदियां :- मनुष्य इस पृथ्वी पर रहने वाला एक बुद्धिजीवी है। जो अपनी मानसिक सोच के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा करता है। किसान ने अपनी कृषि से जुडी जरूरतों को देखते हुए सिंचाई के लिए नदियों के पास के मैदानों में कृषि करने का लाभ समझा और सिंचाई के लिए नालों का निर्माण किया जिनके द्वारा सिंचाई  के लिए पानी को कृषि क्षेत्र तक पहुँचाया जाता था।

तो ऐसे किसान ने नदियों के जल से प्राकृतिक रूप से सिंचाई की। नदिया  किसान के लिए सिंचाई का एक अच्छा स्रोत बनी लेकिन नदियों से दूर के मैदानों में कृषि वर्षा पर निर्भर थी आइये जाने कैसे।

वर्षा :- नदियों से अलग मैदानों में कृषि पूरी तरह वर्षा पर निर्भर करती थी। वर्षा ऋतू में ही किसान खेत में बीज बोता था ताकि बीज अच्छी प्रकार से अंकुरित हो सके। अंकुरित होने के कुछ दिन बाद पौधे को सिंचाई की जरूरत पड़ती थी।

जिसमे किसान सिवाए वर्षा के इंतजार के  कुछ नहीं कर सकता था। इस प्रकार किसान अपने इस प्राकृतिक साधन से सिंचाई करता था।

प्राकृतिक साधन जो किसान के लिए जरूरी है आज भी (Natural resources-प्राकृतिक साधन)

मृदा :- मृदा कृषि के क्षेत्र में किसान के लिए पहला चुनाव है। क्यूंकि कृषि पूरी तरह मृदा पर ही आधारित है। मृदा भारत में हर जगह अलग अलग तरह की पायी जाती है।

किसान ने मृदा के प्रकारों को फसल के अनुसार बाँट रखा है जिससे किसान को कृषि करने में सुविधा महसूस होती है। मृदा का उपजाऊ स्तर कम होने पर किसान वनस्पति का सहारा लेता था। आइये जाने कैसे

वनस्पति :- वनस्पति प्राकृतिक रूप से उगी हुई झाड़ियां पौधें वृक्ष होते है। जब किसान की मृदा की उपजाऊ शक्ति कम होने लगती थी तब वो हरी खाद के लिए वनस्पति का सहारा लेता था। मृदा में हरे पोधो पत्तो को मिला कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता था।

तो इस प्रकार वनस्पति भी किसान के काम आती रही है। वनस्पति के पोषण का मुख्या स्त्रोत सूर्य का प्रकाश होता है जो की किसान के लिए भी बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

सूर्य का प्रकाश (Natural resources-प्राकृतिक साधन)

Sun Light-सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का मुख्या स्त्रोत है चाहे मानव हो या फिर कोई भी पौधा सूर्य के प्रकाश से भरपूर मात्रा में विटामिन डी को प्राप्त कर के अपने आकर में वृद्धि कर सकता है।

सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाला विटामिन डी मानव के शरीर में हडियों के विकास में बहुत ज्यादा सहायक सिद्ध होता है ठीक इसी प्रकार पेड़ पोधो में भी सूर्य के प्रकाश से वृद्धि की क्षतमा को बढ़ावा मिलता है और किसान को फसल में इस तरह  फयदा होता है।

मित्र किट :- मित्र कीट फसल को दो प्रकार से फायदा पहुँचातें है आंतरिक रूप से और बाहरी रूप से आंतरिक रूप से फायदा देने वाले मित्र किट मृदा के अंदर रहने वाले सूक्ष्म जीव होते है। जो की मिटटी को उपजाऊ बनाने की क्रिया को सुचारु रूप से बनाये रखते है।

सूक्ष्म किट(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

ये सूक्ष्म किट मिटटी को कठोर होने से रोकते है। मिटटी में वायु संचार की प्रकिर्या को बढ़ावा देते है। जिसके कारण फसल को पोषण की प्राप्ति होती है। फसल की पैदावार में वृद्धि होती है। इन जीवो के अलावा एक केंचुआ नाम का जीव भी मिटटी को उपपजाउ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

बाहरी रूप से फसल को फायदा देने वाले मित्र कीट मिटटी की ऊपरी सतह पर रहते हैं।  ये भोजन करने के बाद जो भी मल त्याग करते हैं। उसका पोषण मिटटी के द्वारा पौधों को प्राप्त होता है। जिसकी वजह से पौधे का विकास होता है।   

प्राकृतिक साधन
Conclusion-निष्कर्ष

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