Kesar Farming | केसर की खेती के राज़

By | 24th July 2019
kesar farming
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Kesar Farming in India – केसर 2 से 3 लाख रुपये प्रति किल्लो , Kesar Farming एक एकड़ भूमि में 40kg. पैदावार, केवल 4 माह की kesar Farming

Kesar Farming | केसर की खेती के राज़

परिचय:-

केसर एक सुगंधित और मसालों में खास स्थान रखने वाला वनस्पति उत्पाद है । इसका उत्पादन भारत में हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर में खास तौर से किया जाता है इसके अलावा वर्ष 2018 में कई ऐसी जगह पे भी खेती की जा चुकी है जहां आज तक किसी ने नही की थी जिनमे से एक है हरियाणा । अन्य कई देशों में भी केसर की खेती की जाती हैं । केसर की कीमत बहुत अधिक होने के कारण इसे लाल सोना भी कहा जाता हैं। केसर की खेती करना बहुत सरल है। इसमें ज्यादा मेहनत नही करनी पड़ती है और यह सही सिर्फ 4 महीने की खेती होती हैं।

Kesar का उपयोग

भारत मे केसर का उपयोग खास तौर पे दूध और मिठाई में स्वाद और रंग के लिए किया जाता है । इसके अलावा पनीर, मियोनि, मास आदि में मसाले के रूप में केसर का उपयोग किया जाता है । आयुर्वेद चिकित्सा के लिए भी केसर का उपयोग किया जाता है बहुत से ऐसे रोग है जिनको केसर युक्त ओषधि के द्वार दूर किया जाता है ।

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आधा एकड़ से 50 लाख की Kesar Farming

जैसे कि :- Kesar Farming

  • गठिया नामक रोग
  • बांझपन को दूर करने के लिये
  • यकृत रोग की रोकथाम में
  • बुखार में

बहुत से सौंदर्य उत्पादों के लिए केसर kesar का उपयोग प्रसिद्ध है ।

केसर  के लिए उपयुक्त जलवायु

केसर की खेती को मुखत: समुद्र तट से 1500 से 2500 मीटर की ऊँचाई वाले इलाकों

में किया जा सकता  है। केसर की फसल को 12 घंटे धूप की आवश्यकता होती है अच्छी पैदावार के लिए ।

केसर की खेती के लिए सही समय | Kesar Farming

भारत में केसर की खेती जून ओर जुलाई के महीने के दौरान ग्रीष्म ऋत और अगस्त सिंतबर में शरद ऋतु के लिए के लिए की जाती है । इस फसल का विकास गर्मी में अत्यधिक गर्मी और ठंड के मौसम में अधिक ठंड मिलने पर ज्यादा होता है । ऐसा मौसम भारत मे कर्नाटक, हिमाचल, हरियाणा, जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में पाया जाता है ।

केसर की किस्म | Kesar Farming

भारत मे खास कर केसर की तीन अलग-अलग किस्म मौजूद है ।

एक्विला केसर :- यह एक ईरानी किस्म है । इस किस्म में पौधे का आकार छोटा और केसर के धागे लम्बे होते हैं । इसका रंग कश्मीरी केसर की तुलना में अगर देखा जाए तो थोड़ा कम लाल होता है । अधिक पैदा होने के कारण इसका बाजार थोक का रहता है ये कश्मीरी केसर से कम खुर्च में तैयार होने वाली किस्म है ।

क्रेम्म केसर :- अमेरिका और कुछ अन्य देशो में इस किस्म की farming-खेती की जाती है । कश्मीरी ओर ईरानी केसर के मुक़ाबले इसकी गुणवत्ता कम होती है । इसमे अधिकतर पीले रंग की झलक मिलती है काफी हिस्सो पर इसके फूल बहुत अधिक झड़ते है जिससे फसल की बर्बादी ओर उपज कम होती है । ये बाजार में उपलब्ध सभी किस्म की केसर में जबसे कम दाम वाला है ।

लाचा केसर :- सबसे ज्यादा अधिक गुणवत्ता केवल कश्मीरी मिट्टी की पैदावार इस किस्म का सबसे अधिक दाम बाजार में मिलता है । विश्व मे नंबर एक स्थान पर आता है इस किस्म का नाम । रंग, सुगंध और इसका स्वाद इसे विशेष बनाते है । इन सब गुनवताओ वाला केसर भारत मसीन ही पैदा होता है और कही नही ।

केसर की खेती के लिये भूमी

केसर के उत्पादन के लिए आपको यह ख्याल रखना होगा की जिस खेत मे आप इसकी

खेती करने जा रहे हो वह रेतीली चिकनी बलुआ मिट्टी या फिर दोमट मिट्टी हो परन्तु

kesar Farming अन्य मिट्टी जिससे पानी निकासी की सुविधा हो उसमे की जा सकती

है । पानी के जमाव के कारण केसर के corms सड़ जाते है और फसल नष्ट हो जाती है।

इसलिए कोशिश करे कि ऐसी भूमी का चयन करें जहां मिट्टी में पानी जमा नही होता हो ।

केसर की खेती के लिए खेत की तैयारी

जैसा की हम सभी जानते है कि किसी भी खेती-Farming में सबसे पहले अहम बात होती हैं खेती

से पूर्व खेत को तैयार करना। आपका खेत जितना अच्छा तैयार होगा फसल उतना ही

अच्छा और अधिक होगा। केसर का बीज बोने पूर्व, खेत मे अच्छे से 3-4 बार जुताई कर

मिट्टी को भुरभुरा बना ले। अब आखिरी जुताई से पूर्व खेत मे 300 किवंटल  गोबर का

खाद ओर साथ में 90 kg नाइट्रोजन 60 kg फास्फोरस और पोटास प्रति हेक्टेयर के दर

से अपने खेत मे डाल के अच्छे से जुताई करें।

केसर की खेती के लिए रोपण का समय, विधि एवं दर

सभी फसल में बीज रोपण का एक समय होता है, सही समय के बीच रोपण नही होने के

कारण हमें मन के अनुसार उपज नही मिल पाती है। इसलिए बीज को हमेशा इसके

सही समय से खेत में बोये/लगाये। गर्मी के मौसम में केसर-kesar लगाने का सही समय जून या जूलाई  है केसर के

कॉर्मस लगाते वक़्त ध्यान रहे कि corms लगाने के लिए 6-7cm का गड्डा करे, और दो

corms के बीच लगभग 10cm दूरी रखे।

केसर की खेती के लिए सिचाई

केसर की खेती-Farming के लिए 10cm वर्षा की आवश्यकता होती है। अगर बिज लगाने के कुछ

दिन बाद हल्की वर्षा हो तो खेत मे सिचाई करने की आवश्यकता नही है। परन्तु वर्षा नही

होने पर हमें 15 दिन के अन्तराल में 2-3 सिंचाई करने की आवश्यकता होती है।

सिचाई के दरमियान ध्यान रहे कि खेत में कही पानी जमा न हो ऐसा होने पर पानी

निकासी का जल्द प्रबंध करे।

केसर की खेती की देखभाल – kesar Farming

खेत मे अक्सर जंगली घास पनपते हुए नजर आते हैं इसलिए हमें समय समय पर खेत मे

देख रेख करनी चाहिए केसर फ़सल के लिए रोजाना 8 घण्टे धूप की आवश्यकता होती

है। जब केसर अपने विकास के मार्ग पर हो कॉर्मस से पौधे निकल कर बढ़ने लगे हो

उस वक्त पौधों में नमी बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

केसर के पौधों में फूल आने का समय

केसर की खेती में हमे अक्सर यह देखने को मिलता हैं। कि केसर के पौधो में अक्टूबर

के पहले सप्ताह में फूल लगना आरम्भ हो जाता है और अगले एक महीने तक फूल

लगने की प्रक्रिया जारी रहती है। इस समय केसर के पौधों पर पूरा ध्यान दे और यह

ख़ास कर ध्यान दे कि किसी तरह की बीमारी न हो।

केसर की खेती की कटाई ओर सुखाई

फूल के खिलने के दूसरे दिन सुबह ही फूल को तोड़ कर रख लिया जाता है फूल के सुखने में

ज्यादा दिन नही लगते हैं यह 3-4 घण्टे में ही सुख जाते है, फूल सूखने के बाद फूलों से

केसर को निकाल लिया जाता हैं और इसे किसी कंटेनर में रख दिया जाता है और जब

पूरी फसल कट जाती हैं उसके बाद धूप में सूखा कर उसे बाज़ार में बेचा जाता है।

केसर की खेती से उपज ओर मुल्य के बारे मे

केसर की खेती से प्रति एकड़ ज़मीन से लगभग 35 से 40 किल्लो केसर उत्पाद

हो जाता है। आगर मूल्य यानी कीमत की बात करे तो केसर तोला के हिसाब से

बिकता है बाज़ारों में पतंजलि के उत्पादों में अगर देखे तो केवल 1 ग्राम केसर

300 रुपये के लगभग मिलता है ।

केसर की फसल के रोग और किट – kesar Farming

रोग और किट हर तरह की फसल में अपनी जगह बना हि लेते है । केसर की  फसल के कुछ मुख्य रोग और किट के बारे में जान लेते है ।

  • फ्यूजेरियम नामक रोग इसके लक्षण
  1. इस रोग के कारण मुख्य आधार वाला तना गलने सड़ने लगता है और दुर्गन्ध पैदा करता है ।
  2. कॉर्मस सड़ने लगते है ।
  3. पीले रंग का पदार्थ निरंतर बनता रहता है।
  • वॉयलेट रुट रोटkesar Farming
  1. पत्तियां शुरू से ही क्लोरोटिक दिखाई देती है ।
  2. ये संक्रमण पूरे पोधे को तेजी से अपनी चपेट में ले लेता है ।
  3. पौधा सीघ्र ही सुख कर मर जाता है ।
  • रैजोक्टोनिया क्रोकोराम – kesar Farming
  1. ये रोग फंगस की तरह पौधे में फैलता है ।
  2. इसका प्रभाव नीचे की पत्तियों पर शुरू होता है ।
  3. जड़े सड़ जाती है और अंत पौधा नष्ट होकर माटी में मिल जाता है ।

इन सभी रोगों की रोकथाम के लिए बाजार में बहुत से उत्पाद मौजूद है । लेकिन अगर आप अधिक विषयुक्त उत्पाद का इस्तेमाल करते है तो केसर की गुणवत्ता पे इसका सीधा असर जाएगा । इसलिए जहां तक हो सके जैविक उत्पादों का ही प्रयोग करे ।

फसल ओर अकल आर्गेनिक ही बेहतर होती है

नई कहावत

निष्कर्ष

Kesar Farming & Kesar Price Kesri – इस लेख के माध्यम से केसर की खेती के बारे में सारी जानकारी देनी की पूरी कोशिश की गयी है। जिसमे आपको केसर की खेती कैसे करे, केसर की किस्म, केसर के लिए अनुकूल जलवायु, केसर की खेती के लिए मृदा की स्थिति, केसर के उपयोग, केसर का बाजार में भाव इत्यादि के बारे में बताया है।

अगर आपका कोई भी सुझाव या प्रशन है तो आप हमे कमेंट करके या ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते है।

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