Hard work in the agriculture field

By | 29th October 2018
Hard work in the agriculture field
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Hard work in the agriculture field | कठिन परिश्रम कृषि के क्षेत्र में मशीनी युग से पहले किसान को कठिन परिश्रम(Hard work) कर के खेत में से अनाज की प्राप्ति होती थी। दिन की तपती धूप में भारी गर्मी मेंं भी किसान पूरी मेहनत से पूरे परिवार के साथ खेत में काम करता था। दिन रात एक कर के सारी आपदाओं से लड़ के किसान अपने खेत में अनाज उगा पाता था।

तब जाकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। खेत जोतते वक्त बैलों के साथ-साथ खुद चलना बैलों को सही दिशा देना धूप हो या छांव कुछ नहीं देखता था पहले कठिन परिश्रम ही किसान के काम अहम भूमिका निभाता था। तो क्या होता है कठिन परिश्रम आइये जान लेते है इसके बारें में …..

Hard work in the agriculture field | क्या है कठिन परिश्रम?

Hard work | कठिन परिश्रम के दो प्रकार है शारीरिक और मानसिक

शारीरिक :- शारीरिक परिश्रम में हम अपने शारीरिक गति विधियों द्वारा अपने हाथों पैरों और उनसे जुडी मासपेशियों के द्वारा काम को करते है या फिर किसी भी गति विधि को करते है।

जैसे की कस्सी के द्वारा मिटी खोदना या उठाना , दरांती के द्वारा फसल की कटाई करना , कुल्हाड़ी के द्वारा किसी पेड़ या टहनी को काटना , बेलचे के द्वारा मिटटी भरना और कुऍं से पानी खींचना जैसे कार्यों को करने में हमारा शारीरिक परिश्रम लगता है। 

मानसिक :-मानसिक परिश्रम ऐसी प्रकिर्या होती है जिसमे हम मानसिक गति विधिओं द्वारा काम को पूरा करते है। इस प्रकार के कार्यों में हमें अपने दिमाग से सोचना होत्ता है और कार्य को करने के लिए दूसरे व्यक्ति को आदेश देना होता है।

मानसिक परिश्रम में हम मानसिक शक्ति का उपयोग करते हैं। जोकि शारीरिक शक्ति से बिलकुल अलग होती है। उदाहरण के तोर पे जैसे हम आज के इस मशीनी युग में रहने वाले इंसान है जहाँ रोबोट जैसी तकनीक का उपयोग किया जाता है ,एक रोबोट मानव की सोच का अनोखा तकनिकी प्रदर्शन है।

ये एक मशीन होती है जिसको इंसान आदेश देता है और रोबोट आदेशानुसार कार्य को पूरा करता है। मानसिक परिश्रम को आज के इस अत्याधुनिक युग में “स्मार्ट वर्क” का नाम भी दिया गया है। 

Why the farmer needs to do physical work | किसान को शारीरिक परिश्रम करने की ज़रूरत क्यों पड़ी

जैसा की हम यहाँ बात कर रहें है मशीनीकरण से पहले  किसान और कृषि के बारे में उस वक़्त किसान के पास तकनीकी साधनो का अभाव होने के कारण सब काम खुद ही करने पड़ते थे। हर जीव के लिए सबसे ज्यादा जरूरी काम है

भोजन जुटाना यही काम इंसान को भी करना होता है अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए। कृषि भारत में बहुत सदियों पहले से की जा रही है जब इंसान ने फसल उगना तो सिख लिया था।

लेकिन बहुत समय बीत जाने पर भी काम करने की प्रकिर्या वही थी जो सदियों पहले से चली आ रही थी। थोड़े बहुत बदलाव जरूर किये गए लेकिन शारीरिक परिश्रम वहीँ का वहीँ था। तो कहते है के मरता क्या ना करता ऐसा ही कुछ किसान के साथ भी चला आ रहा था। 

इतना कठोर परिश्रम(Hard work) होने की सबसे पहली वजह है

Due to lack of technical tools | तकनिकी साधनो के आभावके कारण

किसान की शुरुआत कृषि के क्षेत्र में इतनी अच्छी नहीं थी जितनी आज है। आज का दौर कृषि क्षेत्र में क्रांति ला चूका है। तकनिकी साधनो का पूरा प्रचलन और प्रसार है। यहाँ तक के सरकार भी किसान के लिए नए नए उपकरण लेने के लिए ऋण योजनाए बनती है।

जिसका किसान पूरा लाभ उठाते है।लेकिन मशीनी युग से पहले किसी भी प्रकार की स्वचालित मशीनरी नहीं थी किसान के पास जिसको इस्तेमाल करके वो अपने कठोर परिश्रम में बदलाव ला सकता था। 

Different conditions of land | जमीन की स्थिति का भीन भीन प्रकार का होने के कारण

किसान के आगे ये भी एक बड़ी चुनौती थी की खेती करने के लिए जमीन का सुधार करना बहुत आवश्यक था। जमीन हर जगह एक जैसी नहीं होती थी ,कहीं पे बिलकुल सख्त तो कहीं पे पथरीली ,तो कहीं पे रेतीली कहीं से ऊँची तो कहीं पे नीची बहुत ही मेहनत लगती  थी

जमीन  सुधार करने के लिए सालों निकल जाते थे मिटटी को समतल करने में मिटटी को उपजाऊ बंनाने में। यहाँ भी किसान के पास कठिन परिश्रम से बचने की कोई विधि नहीं थी

Knowledge of metal | धातु का ज्ञान पूरा न होने के कारण

इंसान को खेती के लिए नए उपकरणों के साथ साथ धातु का ज्ञान होने की आवशयकता थी। धातु का ज्ञान पूरा न होने के कारण लोहे से बने औजार और कृषि यंत्रों का बहुत कम विकास कर पाया किसान ।

किसान को लकड़ी से बने औजारों के साथ ही कठिन परिश्रम करना पड़ता था। खेत की जुताई किसान बैलों के द्वारा चलने वाले उपकरण हल का प्रयोग किया जाता था जोकि पूरी तरह से लकड़ी का बना होता था। लोहे से बने हल के मुक़ाबले लकड़ी का हल मिटटी में कम धस्ता था।

जिसके कारण जुताई में भी कोई गहरा परिणाम नहीं मिलता था और परिश्रम अधिक करना पड़ता था। बैलों को सही दिशा दिखने के लिए और हल को पकड़ कर चलाने के लिए किसान को खुद भी बैलों की तरह ही कार्य को करना पड़ता था।

Dependence on natural resources | प्राकृतिक साधनो पे निर्भरता के कारण

किसान का सारा जीवन चक्र फसल के ऊपर निर्भर करता था और फसल का सारा जीवन चक्र प्रकृति पे निर्भर था। फसल उगाने के लिए किसान को मानसून का इंतजार करना पड़ता था।

मानसून आने से पहले खेत की जुताई कर देना और मानसून ना आने के कारण खेत में बीज की बुआई नहीं हो पाती थी अगली फसल के लिए खेत को फिर से त्यार करना पड़ता था जिसके कारण परिश्रम और अधिक कठिन बन जाता था। 

Lack of fertilizers | उर्वरकों का आभाव होने के कारण

अच्छी प्रकार से मिटटी की जुताई न होने के कारण हर फसल देने के बाद मिटटी की उपजाऊ शक्ति कम पड़ जाती थी। जिसको पूरा करने के लिए किसान पशु पालता था और उन पशुओं के मल के द्वारा त्यार खाद को खेत में डाल कर कुछ हद तक उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता था। इस सारी प्रकिया को करने में भी कठोर परिश्रम शामिल होता है।

Good variety of seeds | बीज का अच्छी किस्म का न होने के कारण

किसान कई बरसो से उन्ही बिज्जों का उपयोग करता आ रहा था बुआई के लिए जो वो हर बार बोता था। बीजों की किस्सम बहुत पुरानी होने के कारण उनमें भी परिवर्तन की जरूरत थी।

खेत में बुआई करने के बाद बहुत बार ऐसा होता था के किसान के द्वारा बोये गए बीज उपजे नहीं अंकुरित नहीं हुए। किसान फिर से मेहनत करके बीजों को खेत में बोया करता था जो की कठिन परिश्रम बन जाता था।

Family observance | सबसे ज्यादा जरूरी बात परिवार का पालन करने के कारण

किसान भी अन्य जीवों की तरह परिवार को बढ़ावा देने वाला जीव है जोकी परिवार और समूह में रह कर अपने जीवन में खुशियों का आनंद लेता है दुःख और सुख का अनुभव करता है।

एक बार परिवार बंनाने के बाद किसान के पास उस समय में सबसे बड़ी चुनौती थी पेट भरना और पेट भरने के लिए जरूरत होती है अनाज की जिसके लिए इंसान कठिन परिश्रम के साथ साथ संघर्ष भी करता था।

What did the farmer get from hard work

किसान को कठिन परिश्रम से क्या मिला

  • आपसी मेलजोल की भावना सब में थी क्यूंकि सब काम शारीरिक परिश्रम से होते थे और आपसी मेल जॉल से ये काम थोड़े सरल हो जातें थे सब एक दूसरे की जरूरतों को समझतें थे। 
  • इंसान एक दूसरे की परवाह करते थे।  
  • परिवारिक संबंध मजबूत होते थे। 
  •  बच्चों को माँ बाप के साथ साथ पूरे परिवार से प्यार मिलता था। 
  • बुजुर्ग लोगो का सम्मान होता था। बुजुर्ग भी अपने परिवार में सब के साथ मिल जूल कर रहतें थे। 
  • लोग बड़े दयालु थे सबके अंदर दया भावना थी। 
  • कठिन परिश्रम से किसान ने रोग मुक्त शरीर को प्राप्त किया। 

कठिन परिश्रम से किसान को ये सब मिला जो हमने आज खो दिया है।

आज का जो समय है इस समय में अधिकतर लोग मानसिक परिश्रम (स्मार्ट वर्क) से ही सब काम कर लेते हैं। आज के इस अत्याधुनिक युग में खास कर पैसे कमाने को लेकर ,खरीदारी को लेकर, यात्रा को लेकर और भी बहुत से काम है, जो आपके मानसिक परिश्रम से ही हो जाते है।

लेकिन इन सब चीज़ों से आपसी मेलजोल की भावना खतम होने की कगार पे है। पारिवारिक संबंध टूटतें जा रहे है सब कुछ टुकड़ों में बंट गया है। बच्चें माँ बाप से प्यार को तरशते हैं।  वृद्ध हो जाने पर तो मानो बुढ़ापा अभिशाप ही बन्न जाता है।

वृद्ध इंसान से कोई बात तक करना पसंद नहीं करता। दया नाम की तो कोई चीज़ रही ही नहीं है आज के इस युग में।

What is the disadvantage of hard work | कठिन परिश्रम में किसान का नुकसान क्या है

कठिन परिश्रम से किसी को कोई नुकसान नहीं होता है। अगर मेहनत करने वाले को ये पता हो के वो मेहनत सही दिशा में की जा रही है। 

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Conclusion-निष्कर्ष

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