Gobhi ki kheti se 90 din mein 4 Lakh munafa

By | 18th November 2019
Gobhi ki kheti
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Gobhi ki kheti se 90 din mein 4 Lakh munafa | क्या आप भी करना चाहते

है फूल Gobhi ki kheti, अगर हाँ तो सबसे पहले जानना जरूरी है, के क्यों

करनी चाहिए Gobhi ki kheti, क्या फायदे होते है Gobhi से, Gobhi में

कौन से पोषक तत्व पाए जाते है। Gobhi ki kheti करके मुनाफा कितना

होगा और खर्च कितना आएगा। Gobhi को खरीदने के लिए सही खरीदार और

दाम कहाँ मिलेंगे। तो चलिए जानकारी लेते है Gobhi ki kheti के बारे में

खेत से लेकर बाजार तक…………|

Gobhi ki kheti se 90 din mein 4 Lakh munafa

फूल गोभी की सब्जी तो बनती ही है साथ में ये सहायक सब्जी भी है, जैसे आलू

गोभी, गाजर गोभी, मटर गोभी इनके अलावा और भी बहुत से अलग प्रकार के

व्यंजनों में गोभी का उपयोग किया जाता है। गोभी का अचार बड़ा खास व्यंजन

है। तो भाई चलिए सबसे पहले हम गोभी में छिपे पोषक (Gobhi

Nutrition) तत्वों को जान लेते है।

Nutrients of Cauliflower – फूलगोभी के पोषकतत्व

  • कैल्शियम
  • फास्फोरस
  • प्रोटीन
  • कार्बोहाइड्रेट
  • लौह तत्व
  • विटामिन ए, बी, सी,
  • आयोडीन
  • पोटैशियम
  • थोड़ी सी मात्रा में तांबा भी मौजूद होता है।

गोभी कैंसर रोग की रोकथाम करने में भी सहायक है। गोभी आपको इतने सारे पोषक तत्व एक साथ प्रदान करती है।

इन सभी पोषक तत्वो के हमारे शरीर में बहुत से फायदे है। ये सभी हमें कितनी

आसानी से मिल रहे है, फूलगोभी की वजह से और फूलगोभी भारत में बहुत

अधिक मात्रा में ऊगाई और खायी जाती है। आइये जान ते है, के ये सभी पोषक

तत्व किस तरह से हमारे शरीर को फायदा पहुंचाते हैं।

Cauliflower Benefits – फूलगोभी के फायदे

  1. खून साफ करने और चमड़ी के रोगो से दूर रखने में बेहद फायदेमंद है गोभी।
  2. कैल्शियम की भरपूर मात्रा होने से गोभी हड्डियों, जोड़ों और दांतों की समस्याओं को दूर रखती है गोभी।
  3. पेट की बहुत सी समस्याओं में बेहद फायदेमंद होती है गोभी।
  4. हमारे लिवर में मौजूद एंजाइम को सक्रिय करने के लिए गोभी का सेवन बहुत अधिक फायदेमंद होता है।
  5. गले का दर्द, सूजन और गले से संबंधित अन्य समस्याओं में गोभी के हरे पत्ते बहुत फायदा देते है।
  6. गर्भ अवस्था में Gobhi का सेवन लाभकारी पाया गया है यह फोलेट, विटामिन ए और विटामिन बी से भी भरपूर होती है और कोशिकाओं के विकास के साथ ही इससे गर्भ में पल रहे भ्रूण को काफी लाभ होता है।
  7. इसका सेवन वजन कम करने में भी बहुत मददगार पाया गया है। क्यूंकि गोभी में विटामिन सी की प्रचूर मात्रा पायी जाती है और विटामिन सी हमारे शरीर से अतिरिक्त चर्बी को बाहर निकल देता है।
  8. इन सभी फायदों के साथ एक और बड़ा गजब का फायदा मिलता है हमारे शरीर को गोभी का सेवन करने से ये एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह हमारे शरीर से बेकार पड़े तत्वों को मल के द्वारा बाहर निकाल देती है।

यहां तक आप फूल गोभी के फायदों के बारें पूरी तरह से जान गए हो। अब हम जाने गे गोभी की खेती सफलता पूर्वक करने के लिए किस तरह की जलवायु का होना जरूरी है।

Climate for cauliflower – Gobhi ki kheti ke liye जलवायु

गोभी की खेती के लिए ठंडा मौसम सबसे अच्छा माना गया है, क्यूंकि मध्यम

ठंडा मौसम गोभी की खेती को प्रकृति का वरदान है। ऐसी जलवायु को हम 12

से 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान में आंकते है। इससे कम तापमान वाली

जलवायु में गोभी के फूल छोटे रह जाते है और पत्ते पिले पड़ जाते है। तो

मध्यम ठंडी जलवायु गोभी की फसल के लिए सबसे बढ़िया मौसम है।

यहाँ एक सवाल का जन्म होता है, जोकि बारिश से जुड़ा हुआ है। सवाल बनता है, बारिश की कितनी मात्रा गोभी की फसल के लिए सही रहती है?

तो किसान भाइयों 120 से 125 मिली मीटर बारिश की मात्रा एक सही आंकड़ा

बताया गया है। इससे अधिक बारिश Gobhi ki kheti को नुकशान पहुंचा

सकती है।

Soil Health for Cauliflower – फूलगोभी के लिए मिटटी का स्वास्थ्य

फूल गोभी रेतली, दोमट और चिकनी किसी भी तरह की मिटटी में उगाई जा

सकती है। गोभी के पौधे की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं जाती इसलिए हम बड़ी

आसानी से घर पर ही गमले में भी गोभी को उगा सकते है। बस ध्यान रहे

मिटटी किसी भी तरह की हो बस उसमे जीवांश की प्रचूर मात्रा होनी चाहिए,

मिटटी का पि.एच. 6-7 होना चाहिए।

यहाँ एक सवाल का जन्म होता है, जोकि मिटटी की तैयारी से जुड़ा हुआ है। सवाल बनता है, फसल को खेत में सही तरह से रोपाई करने के लिए मिटटी को कैसे तैयार करें? तो जवाब कुछ इस तरह है।
Gobhi ki kheti

जवाब:- सबसे पहले मिट्टी का पि.एच. मान ज्ञात करें, अगर मात्रा निर्धारित

इकाई से कम है। तो इसको बढ़ाने के जैविक उपचार करें। सही मात्रा मिलने पर

खेत को पानी से सींच लें जिसको “पलेवा” बोलते है। इसके बाद हल्की नमी

होने पर खेत की अच्छे से 2 बार जुताई करें ताकि मिटटी भुरभुरी हो जाए और

पौधों को मिट्टी में आसानी जड़ें फ़ैलाने का मौका मिले।

Advanced variety of cauliflower – फूल गोभी की उन्नत किस्म 

मौसम के आधार को देखते हुए फूल गोभी की किस्मो को तीन अलग भागों में

बांटा गया है, क्योंकि गोभी की फसल मौसम से प्रभावित होती है। इसलिए

अगेती, मध्य, पछेती तीन तरह की किस्म गोभी को मिली है। जिनके बारे में

विस्तार कुछ इस प्रकार है।

अगेती किस्मे: पूसा दीपाली, अर्ली कुंवारी, पूसा कार्तिक, पंत गोभी-2 और 3, पूसा अर्ली सेन्थेटिक, सेलेक्शन 327 और 328 ।
मध्यम किस्में: हिसार 114, एस-1, पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा स्नोबॉल, के-1, पूसा अगहनी ।
पछेती किस्में: पूसा स्नोबॉल-1, पूसा स्नोबॉल-2, पूसा के-1, विश्व भर्ती,
Good Information

इसके अतिरिक्त आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र जाकर अच्छी किस्मो

के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।

अब बारी आती है पौधों की रोपाई की, अगर आप ने खुद ही नर्सरी तैयार की है,

तो अच्छी बात है। अगर नही तो आप पौधे खरीद के ला सकते है । जिनकी

कीमत क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है । 

पौधे कम से कम 30 दिन के हो जिनकी लंबाई 6 से 7 सेंटीमीटर होनी चाहिए

ध्यान रहे पौधे स्वस्थ ही लगाए ।

पौधों को पंक्तियों में ही लगाना समझदारी है । मौसम के अनुसार पौधे से पौधे

की दूरी और पंक्ति से पंक्ति की दूरी अलग बताई जाती है ।

लेकिन आप हर 50cm पौधे से पौधे और 50cm ही पंक्ति से पंक्ति की दूरी में

आसानी से फसल तैयार कर सकते है । 

Cauliflower Planting time – रोपाई का समय

अगेती फसल के लिए मध्य जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक । मध्य फसल

के लिए अगस्त के मध्य में पछेती फसल के लिए अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से

लेकर नवंबर के मध्य तक ।

Manures and Fertilizersखाद और उर्वरक Gobhi ki kheti

फूल गोभी की अधिक पैदावार के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद 35 से 40

क्विंटल और एक क्विंटल निम की खली का उपयोग करें । रोपाई के 15 दिनी

बाद वर्मी वाश का प्रयोग करें । कोशिश करें कि जैविक तत्व ही प्रयोग में लाये

ताकि खाने वाले भी सुरक्षित रहें और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित न हो।

Right way of irrigation – सिंचाई का सही तरीका

रोपाई करने के तुरंत बाद ही सिंचाई करें । इसके बाद जांचते रहें कि भूमि में

नमी बनी रहनी चाहिए । नमी से ही फसल को बढ़ने में सहायता मिलेगी ।

अधिक गर्म मौसम में पानी की जरूरत ज्यादा होती है जिसमें सप्ताह दर

सप्ताह पानी देना पड सकता है । 

कम गर्म मौसम में पानी की आवश्यकता ज्यादा नही होती इसलिए 15 दिन के

अंतराल में नमी की स्थिति जांचते हुए सिंचाई करें

Weeding hoeing – निराई गुड़ाई Gobhi ki kheti

खरपतवार को काबू करने के लिए निराई गुड़ाई करते रहें । ऐसा करने से पौधों

की जड़ों में भी ऑक्सीजन की सही मात्रा मिलती रहती है । पौधों को पनपने में

आसानी रहती है।

Cauliflower plant pests and diseases – गोभी के पौधे में आने वाले किट व रोग

रोग – गोभी के पौधे में होने वाले रोग लगभग फफूंदी और बैक्टेरिया की वजह

से होते है । इसका उपचार आप शुरुआत में ही कर सकते है । निम की खली

मिट्टी में मिला कर जोकि बहुत असरदार फफूंद नाशक और किट नाशक है । 

किट – गोभी के पौधों में कुछ कीटों के आक्रमण भी होता है जिनके नाम कुछ

इस प्रकार है ।

कैबेज मैगेट ये किट जड़ों पर आक्रमण करके पौधे को सूखा देता है । इसकी

रोकथाम के लिए निम की खाद का प्रयोग करना चाहिए ।

चेप्पा – ये किट पत्तियों से और पौधे के दूसरे नरम हिस्सों से रास चूसता है ।

जिसके कारण पत्तियों की बढ़त रुक जाती है और रंग में पीली दिखाई देती है। 

Gobhi ki kheti
Gobhi ki kheti

Cabbage Production

इसकी रोकथाम के लिए निम का काढ़ा बनाये और उसको गौमूत्र के साथ

मिलकर मिश्रण तैयार करले और 700 मिली लीटर की मात्रा में प्रति स्प्रै टैंक

मिला कर फसल में इस तरह से छिड़काव करें कि पौधे बिल्कुल तर हो जाये ।

डाईमंड बैकमोथ – ये किट रंग में भूरे, कत्थई रंग के होते है । जोकि 1 cm लंबे

होते है । इसके अंडे 0.5 – 0.7 मि. मी. व्यास के होते है, इनकी सुंडी 1 cm

लम्बी होती है । ये सुंडी पौधे की पत्तियों को किनारों से खाती है । 

इसकी रोकथाम के लिए गौमूत्र और नीम के तेल का मिश्रण तैयार करें । 500

मि. ली. के हिसाब से प्रति स्प्रे टैंक में मिला कर छिड़काव करें और ध्यान रखे

की पौधा जड़ से फुंगल तक पूरा तर होना चाहिए ऐसा करने से इस कीट से

मुक्ति मिलेगी और आपकी फसल सुरक्षित रहेगी ।  

सावधानी : जब आप बीज बोए तो उसको उपचारित जरूर करें । जिसके लिए आप निम के तेल और गौमूत्र के मिश्रण का प्रयोग करें ।

ये तो थी रोग, किट, रोकथाम की बात अब कटाई की बात समझते गई ।

Cauliflower harvesting – गोभी की फसल की कटाई 

प्रजाति के अनुसार गोभी की फसल के तीन वर्ग है । अगेती, मध्य, पछेती और

इसके अनुसार फसल भी अलग समय चक्र के हिसाब से तैयार होती है ।

जैसे कि अगेती फसल तैयार होती है, रोपाई के 60-70 दिनों में ।

मध्य क़िस्म फसल तैयार होती है रोपाई के 90-100 दिनों में ।

पछेती क़िस्म रोपाई के 110-180 दिनों में तैयार होती है ।

फसल तैयार हो गयी है इसका पता चलता है तब जब फूल दिखने में ठोस,

आकार में बड़े और आकर्षक दिखते है ।

बस ऐसा होने पर समझ जाएं कि नोट गिनती करने का समय आ गया है💵😃 

Income | आमदनी gobhi ki kheti se

उपज : फूल गोभी की अच्छी फसल प्राप्त होने पर ये प्रति 1 हेक्टेयर यानी

2.47 एकड़ क्षेत्र से 200 – 250 क्विंटल की पैदावार देती है ।

चलो कम से कम उपज में 20 रु प्रति किल्लो के भाव को लेकर आमदनी का अनुमान लगतें है|

उपज भाव कुल रकम
1 क्विंटल (100 किल्लो)20 रुपये प्रति किल्लो 100 x 20 = 2000 रु
200 क्विंटल (20,000 किल्लो)20 रुपये प्रति किल्लो 20,000 X 20 = 4 लाख

तो देखा आपने अगर 200 क्विंटल पैदावार मिले और 20 रु प्रति किल्लो भाव

मिले तो आप 4 लाख तक की आमदनी कर सकते हो |

अगर आप इसमें मोटा सा खर्च भी लगाये मानलो 20,000/- रु आपने Gobhi

ki kheti में लगा दिए | तो यहाँ आप खुद देख सकते है, कितना बड़ा मुनाफा

आप सिर्फ 90 दिन में ले रहे हो |

मेरी सोच | Gobhi ki kheti

तो मेरे प्यारे किसान भाइयों मैं आपको येही कहना चाहूँगा के हम सिर्फ आपको

एक राह दिखाते है, के ऐसे चलना है | लेकिन बेहतर आप तभी बनोगे जब

इस पर काम शुरू करोगे| इसलिए मैं ये कहूँगा के जब तक आप खुद इस विधि

को नहीं करोगे तब तक आप इसकी अच्छाइयों और बुराइयों को नहीं समझ

पाओगे इसलिए अगर मन बनाया है| तो कर डालो|

Gobhi ki kheti

आपसे निवेदन है

Gobhi ki kheti se 90 din mein 4 Lakh munafa| अगर आपको यहाँ से जरा सा भी अच्छा ज्ञान प्राप्त हुआ है, आपको ये लेख अच्छा लगा है| तो, अपने मित्र प्यारों को भी इसकी जानकारी दो उनके साथ साँझा करो | और मेरे मनोबल को भी बढ़ावा दो कमेंट करके |

अगर आपका कोई सुझाव या सवाल है तो उसे हम तक जरुर पहुंचाए |

agriculturetechonline@gmail.com

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