Farming before mechanization-मशीनीकरण से पहले खेती

Farming before mechanization-मशीनीकरण से पहले खेती

मशीनीकरण से पहले खेती
मशीनीकरण से पहले खेती

आप चाहें कहीं भी चलें जाएं खेती से जुड़ें पहलु हर जगह अपना महत्व बनाये हुए है। भारत का आजादी से पहले का कृषि का दौर कुछ ख़ास नहीं था। कृषि संसाधनों के अभाव के साथ साथ कृषि योग्य भूमि भी कम पड़ रही थी। लेकिन लोगो के भरण पोषण जा जरिया खेती ही था। अब कोई और चारा भी नहीं था लोगो के पास पेट भरने के लिए।

मशीनीकरण से पहले खेती

Farming before mechanization-मशीनीकरण से पहले किसान खेती में सब काम शारीरिक मेहनत करके किया करता था। किसान खेत को फसल के लिए त्यार करने के लिए बैलो का उपयोग करता था। फसल उगाने का सही समय मॉनसून पर निर्भर करता था। इतना अनाज भी नहीं पैदा कर पता था किसान के अपने परिवार का ही पेट भर सके। हालत ये थे की अनाज बाहर से मंगाने को तैयार थे। लेकिन अनाज बाहर से भी तभी आता अगर किसान के पास अनाज खरीदने के लिए पर्यापत धन होता।

अनाज ले देकर काम चलाते थे

तो लोग एक दूसरे से अनाज ले देकर काम चलाते थे। प्राकृतिक साधनो पर किसान को निर्भर रहना पड़ता था। उस वक़्त ट्यूब वेल नहीं हुआ करते थे। मानसून का इंतजार करना पड़ता था बुआई के लिए। 

सूखा पद जाने पर मरने के हालात पैदा हो जातें थे इंसान तो क्या सूखा पड़ने पर जानवर भी मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे। जीवन बहुत कठिन था। कोई फसल चक्र भी नहीं बन पता था। खेत की जुताई के लिए लकड़ी के हल हुआ करते थे जिनको बैलो के द्वारा चलाया जाता था। हल से जमीन की जुताई गहराई तक नहीं हो पाती थी। जिसके कारन जमीन की उपजाऊ शक्ति कम थी।

फसल नस्ल अनुसंधान केंद्र उपलब्ध नहीं था – मशीनीकरण से पहले कृषि

किसान अपने द्वारा उगाये गए अनाज का ही उपयोग बीजो के लिए करता था। बीज अच्छी किसम के नहीं थे जिसके कारन पैदावार भी अच्छी नहीं होती थी। पूरा का पूरा जीवन चक्र खेती पर निर्भर करता था। फसल अच्छी तो जीवन में खुशहाली नहीं तो सब कुछ उदासी में बदल जाता था। किसान खेती के साथ साथ पशु भी पालता था और उनके मल से तैयार खात का उपयोग जमीन को उपजाऊ करने के लिए करता था जो की पर्यपत नहीं होती थी। धीरे धीरे फसल उगाने की धरती भी कम पड़ रही थी।

जमीन बंजर

किसान की जमीन बंजर होती जा रही थी। उस वक़्त रसायनिक उर्वरक नहीं थे। फसल उगने के बाद भी बहुत कड़ी मेहनत करनी होती थी। अच्छी खासी फसल में कीट लग जातें थे। किसान मित्र जीवों के द्वारा ही फसल की रक्षा कर पाता था जोकि प्रयाप्त नहीं था। बहुत बार तो ऐसा होता था अछि खासी फसल को किट तबाह कर देतें थे। प्राकृतिक आपदाएं भी बहुत थी जिनका किसान को सामना करना पड़ता था।

सबसे पहली आपदा तो किसान के लिए सूखा मौसम था।

एक किसान के लिए शुष्क मौसम आपदा कैसे थी
मशीनीकरण से पहले खेती
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सूखा मौसम किसान के लिए अभिशाप बनके आता था। खून के आँशु रोता था किसान सूखा आने पर।

किसान के लिए सूखा पड़ने का मतलब मोत के साथ युद्ध करने बराबर था। क्युकी सूखे मौसम में किसान फसल नहीं उगा पता था और सब कुछ तो निर्भर करता था किसान के फसल के ऊपर। फसल न हुई तो अनाज कहाँ से आएगा किसान के परिवार को भूखा मरने पे मजबूर होना पड़ता था आर्थिक आमदनी का और कोई जरिया इतना ख़ास नहीं था की वो अपने परिवार का पेट भर सके नहीं उसके पास पर्यापत धन होता था के अनाज बाहर से खरीद के ला सके। 

ना हीं सरकार की तरफ से कोई मदद मिलती थी। 

सब मिल कर एक दूसरे के साथ अनाज बाँट कर प्रयास में लगे रहते थे के कोई भूखा ना रहे। सूखा पड़ने से किसान के पशु भी मर जाते थे। क्युकी उनके लिए भी चारा नहीं जुटता था। इसके अलावा आस पास उगी सब प्राकृतिक घास भी सूखे से नष्ट हो जाती थी। मानव ने पेट भरने के लिए एक सरल तरीका तो खोज लिया था अनाज को उगाना लेकिन ये पूरी तरह से निर्भर करता था प्राकृतिक साधनो पर और भी बहुत सी  विपदाएं थी जिनका किसान को सामना करना पड़ता था। बाढ़ जिनमे से एक है आइये जानलेते है के बाढ़ कैसे थी किसान के लिए आपदा।

किसान के लिए बाढ़ आपदा कैसे थी

मशीनीकरण से पहले खेती
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किसान के जीवन में खुशाली तब तक ही जब तक प्रकृति उसके साथ रहती। मगर जब प्रकृति किसान से मुँह मोड़ लेती थी तो किसान के ऊपर विपदाओं का पहाड़ टूट पड़ता था। फसल के लिए मानसून का इंतजार करते करते जब मानसून आते थे तो किसान मिलकर खुशियां मनाते थे गीत गाते थे लेकिन कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था के ये खुशिया कितनी बड़ी मुशीबत लेकर आने वाली है।

मानसून रुकने का नाम नहीं लेता था

जब मानसून रुकने का नाम नहीं लेता था तब बाढ़ आती थी बाढ़ मतलब किसान के नाम की एक और मुशीबत किसान के पास बहुत कम साधन उपलभ्द थे बाढ़ से बचने के लिए। बाढ़ से बचने के लिए किसान को ऊँचा स्थान खोजना पड़ता था। जो की बहुत कम जगह उपलब्ध होता था। बाढ़ आती थी और सब कुछ बहा के ले जाती थी किसान के मवेशी भी बाढ़ में बाह जाते थे।

All sick

पीछे रह जाता था तो वो होता था बीमारिया रोग जिनसे बाद के बचें हुए इंसान और पशु ग्रषित हो जातें था। बाढ़ चली जाती थी लेकिन एक नयी मुशीबत पीछे छोड़ जाती थी। बाढ़ के बाद जो भी पानी के साथ बहा के आता था मर्रे हुए जिव जंतु और बहुत सारा कचरा उन सब में दुर्गन्ध पैदा हो जाती थी वो सड़ने लगते थे। जिसके कारण बड़ी बड़ी बीमारियों का जन्म होता था।

प्लेग नाम की बीमारी

उस समय में प्लेग नाम की बीमारी का बहुत चलन होता था जो अक्सर पैदा हो जाया करती थी। सबसे महत्वपूर्ण अच्छी चिकित्षा का प्रबंध न होने के कारन बहुत से लोग मर जातें थे। प्लेग का रोग किसी को नहीं बक्शता था ये जिसको लग जाता था उसके बचने की उम्मीद बहुत कम हुआ करती थी।  जिसकी उम्मीद हुआ करती थी उसको अच्छी चिकित्षा की जरूरत हुआ करती थी जो की सिर्फ सहर में ही उपलब्ध हुआ करती थी। और सहर गाँव से कोषो मिल दूर हुआ करते थे। 

साधान उपलब्ध नहीं थे

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सहर ले जाने के लिए साधान उपलब्ध नहीं थे। बैल गाडी का उपयोग किया जाता था आने जाने के लिए जो की आज की तुलना में बहुत ही धिम्मी गति का साधन हुआ करता था। किसी बीमार को सहर के लिए लेकर जाते तो वो सहर पहुंचते पहुंचते रास्ते में ही दम तोड़ देता था। बहुत ही कठोर जीवन था पहले किसान का जीवन के हर छोर पे एक नयी कठिनाई का सामना करता था किसान।

Conclusion:-

Agriculture before mechanization:- मैंने यहाँ मशीनीकरण से पहले भारतीय किसान कैसे जीवन व्यतीत करता था। इन सब बातों पर ये लेख लिखा है। आपको ये लेख जानकारी प्रदान करने वाला लगा या नहीं जरूर बताना।

“धन्यवाद”

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