Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

By | 29th October 2018
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Farmer's health-किसान का स्वास्थ्य
Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य, स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है। कहावत भी है- ‘पहला सुख निरोगी काया’। कोई आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है, जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है। किसान का स्वास्थ्य

पहले किसान स्वयं ही सब काम करता था। शारीरिक मेहनत बहुत अधिक थी। जिसके साथ साथ स्वास्थ्य आज के मुकाबले कई गुना अच्छा था। किसान की खेती प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होने के कारण अनाज में भी पोषण की मात्रा अधिक थी।

शारीरिक रूप से किसान स्वस्थ और मजबूत रहता था। बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जिनसे पहले इंसान मुक्त रहता था और आज बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जो निरंतरता में आ चुकी हैं। ऐसी बीमारियां जो हर घर में मिलने लगी है और जो पहले नहीं थी। तो क्या होता है ये स्वस्थ्य आइये जान लेते है। ………

क्या है स्वास्थ्य(Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य)

स्वास्थ्य शब्द दो शब्दों को मिला कर बनता है स्वा और अस्थ्य यहाँ स्वा का अर्थ है स्वयं का और अस्थ्य का अर्थ है अस्थिया यानि हमारे शरीर का ढांचा स्वास्थ्य की तुलना दो प्रकार से की जाती है एक होता है स्वस्थ और दूसरा अस्वस्थ।

  • स्वस्थ :- किसी मानव का स्वयं का शरीर बिल्कुल सही हो और हर प्रकार से काम करता हो तो उस व्यक्ति को स्वस्थ व्यक्ति कहा जायेगा। जिसके तीनों दोष (वात, पित्त एवं कफ) समान हों, जठराग्नि सम (न अधिक तीव्र,न अति मन्द) हो, शरीर को धारण करने वाली सात धातुएं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य) उचित अनुपात में हों, मल-मूत्र की क्रियाएं  भली प्रकार होती हों और दसों इन्द्रियां (आंख, कान, नाक, त्वचा, रसना, हाथ, पैर, जिह्वा, गुदा और उपस्थ), मन और सबकी स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो, तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ कहा जाता है।
  • अस्वस्थ  :- किसी मानव का स्वयं का शरीर पूरी तरह सही ना हो और हर प्रकार के काम करने में सक्ष्म ना हो ,तो ऐसे व्यक्ति को अस्वस्थ व्यक्ति कहा जाता है।

ये थे स्वास्थ्य के प्रकार। इनमे ज्यादा जरूरी है मानव का स्वस्थ रहना चलिए जान लेते है मनुष्य स्वस्थ कैसे रह सकता है। 

स्वस्थ कैसे रहा जाये

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य,

स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने जीवन में नियमो का पालन करना चाहिए। 

  • सबसे पहला नियम भोजन पोषण से भरपूर और सही समय पर करना चाहिए  
  • नियमित रूप से व्यायाम या योगासन करना चहिये 
  • स्वास मुँह बंद करके नाक के द्वारा लेनी चाहिए 
  • अपने शरीर की साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए 
  • बाजारू खाने से परहेज करना चाहिए 
  • खुश रहो और दूसरों को भी खुश करते रहना चाहिए 
  • अच्छे कामो को जीवन में अहमियत देनी चाहिए 

किसान के स्वास्थ्य का राज़ 

कठिन शारीरक परिश्रम और संघर्ष भरा जीवन ही किसान के स्वस्थ जीवन का राज़ रहा। 

मशीनी क्रांति आने से पहले कृषि के सभी कार्य किसान शारीरिक परिश्रम करके ही करता था। 

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

जैसे की :- खेत को बिजाई के लिए तैयार करना। ये काम मशीनीकरण से पहले किसान बैलों के द्वारा करता था। बैलों के साथ हल को जोड़ कर किसान स्वयं मार्गदर्शन करता था। चाहे धुप हो या छाव किसान बैलों को दिशा नीरदेश देने के लिए उनके साथ साथ चलता था। जिस कारण किसान की मासपेशियां मजबूत रहती थी। शरीर रोग मुक्त बना रहता था। 

प्राकृतिक साधनो पर निर्भरता के कारण अनाज पोषण से भरपूर होते थे। 

यानि के  किसी भी प्रकार का रसायनिक उर्वरक उस समय फसल में नहीं डाला जाता था। मिटी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक साधनो का प्रयोग किया जाता था जैसे की हरी खाद के लिए पौधों के अवशेष मिटटी में मिला कर पूर्ति की थी। मवेशियों द्वारा प्राप्त मल को खाद में परिवर्तित होने के बाद मिटटी में मिलाया जाता था। इन सब से कोई भी ऐसे तत्व अनाज में नहीं आते थे जो मानव शरीर के लिए हानिकारक हो।   

वातावरण का शुद्ध होना भी एक कारण है 

किसान के शरीरिक रूप से स्वस्थ रहने का

Hard work-कठिन परिश्रम

उद्योगिक क्रांति से पहले हमारा वायु मंडल इतना प्रदूषित नहीं था जितना के आज है। इसलिए किसान का जीवन प्रदुषण मुक्त होने के साथ रोग मुक्त भी रहा। 

Conclusion-निष्कर्ष

बस यही सब वो घटक थे जिनसे किसान का शरीर स्वस्थ बना रहता था 
All these were the components from which the farmer’s body remained healthy

Agriculture And Farmer-कृषि और किसान

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

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