Agriculture and farmers-कृषि और किसान

Agriculture and farmers-कृषि और किसान

Agriculture and farmers-कृषि और किसान
Agriculture and farmers-कृषि और किसान

Agriculture and farmers-कृषि और किसान का हम सब के जीवन में बहुत महत्व  है। ये दोनों सब के जीवन के हिस्से है।   चलो जाने की कैसे है कृषि और किसान इंसान के जीवन के हिस्से। 

क्या है कृषि

इंसान के द्वारा भूमि से जंगल को साफ करके बनाई गयी जगह पर उगायी गयी फसल चक्र के दौरन की गयी गति विधियों को कृषि कहतें है। इन सब गतिविधियों में किसान पशुपालन को भी बढ़ावा देता था। उस समय रासायनिक उर्वरको का कोई नामो निशान भी नहीं था। इसलिए धरती में मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए किसान पशुओं के मल से तैयार खाद और हरे पोधों का उपयोग करता था। 

अब आप  सोच रहे होंगे के इंसान को फसल उगाने की जरूरत क्यों हुई , वैसे तो ये बात सभी को पता होगी की फसल उगाने की जरूरत क्यों पड़ी क्यों करना पड़ा कृषि जैसा काम। चलिए ये भी जान लेते है। 

क्यों करना पड़ा कृषि जैसा काम(Agriculture and farmers-कृषि और किसान

बात शुरू होती है प्राचीन काल से जब हमारे पूर्वज पेट भरने के लिए जानवरों का सिकार कर के मास खाया करते थे, तभी अपने जीवन काल में उन्होंने कुछ ऐसे बीजों की खोज कर ली जिनको इंसान आसानी से खा और ऊगा सकतें थे।

फिर मानव ने उन बीजों को अपने भोजन में शामिल करना शुरू कर दिया। मास के साथ साथ वें इन बीजों को भी खाने लगे। इस प्रकिर्या द्वारा परिवार का भरण पोषण करना इंसान को बेहतर लगने लगा। 

अब आप सोच रहेँ है के बेहतर कैसे लगा तो चलिए ये भी जान लेते है।

बीजों को भोजन बनाना बेहतर कैसे लगा

जब इंसान ने उगाये हुए बीजों को खाने में शामिल किया तो उनको ये बेहतर लगा सिकार करके मास खाने से ,क्यूंकि सिकार करने के लिए उनको अपना निवास स्थान छोड़ कर दूर जाना पड़ता था। जिसकी वजह से परिवार की सुरक्षा में जोखिम उत्पन होता था।

सिकार करने में बहुत समय लगता था फिर कभी कभी सिकार नहीं मिलने के कारण परिवार को भूखा ही रहना पड़ता था। 

तो बहुत से कारणों को देखते हुए इंसान को बीजों को उगाना ही बेहतर लगने लगा। बीजों को उगाने के बाद एकत्र किया जा सकता था और एकत्र किये हुए बीजों को कभी भी खा सकतें थे। जिससे परिवार में कोई भूखा नहीं रहता था सब का भरण पोषण अच्छे से होने लगा। परिवार की सूरक्षा भी आसानी से की जा सकती थी। 

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धीरे धीरे इंसान ने बीजों को उगाने और इनको भोजन बनाने की भीन भीन प्रकार की विधियों की खोज की और निरंतर बदलाव के चलते आज हमें कृषि के द्वारा अनेक प्रकार के अनाज मिल पाएं हैं जिनको हम अपना भोजन बना रहें हैं।  

और येही वो कारण थे जिनके रहतें इंसान को कृषि में निरंतरता करनी पड़ी। यानी के कृषि जैसा काम करना पड़ा और कृषि मानव के जीवन का एक हिस्सा बन गयी। अब किसान पे विचार करते हैं 

कैसे है किसान मानव के जीवन का हिस्सा(Agriculture and farmers-कृषि और किसान)

अगर हम प्राचीन काल से अब तक के कृषि के पेहलूओं का नेतृत्व करें तो देखें गे के मानव ने कृषि की खोज की , कैसे जंगलों को काट कर कृषि योग्य भूमि को तैयार किया कृषि में नए नए बदलावों को महसूस किया

उस भूमि को उपजाऊ बनाया जहाँ बीजो को उगाना मुश्किल होता था। धरती और मिट्टी के साथ खुद का रिश्ता कायम किया और खुद को एक औधा दिया जिसका नाम है अन्न दातां यानि के किसान अगर आज किसान कृषि करना छोड़ दे तो क्या आपके घरों में अनाज आएगा मिले गी किसी को रोटी कैसे खाये गा कोई बना के पकवान आप खुद ही सोचों है के नहीं किसान हर एक मानव के जीवन का हिस्सा।

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बस इतना  कहना चाहूंगा। 

” अन्न  दातां  सुखी  भव: ”  

किसान है तो कृषि है कृषि है तो किसान है

जय हिंद

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