Monthly Archives: January 2019

Floating Farms In India Farming Technology

By | 23rd January 2019
Floating farms

Floating Farms In India Farming Technology | तैरते खेत क्या है , हम कैसे बना सकते है इन तैरते खेतो को, कौन सी फसले ऊगा सकते है Floating Farms पर और इसे कहाँ किया जा सकता है इन सब से जुड़ें सभी सवालों के जवाब मिलेगें आपको इस लेख के माध्यम से। ..,

Floating Farms In India Farming Technology

क्या आपने कभी तैरते हुए खेत देखे है । जहां भूमि कम है और पानी ज्यादा दुनिया भर में ऐसे बहुत से देश है जहां खेती योग्य भूमि कम है और पानी ज्यादा या जहां साल भर बाद जैसा माहौल रहता है

वहां के लोग क्या खाये कैसे जिये तैरती हुई खेती इस ये बात सिद्ध करदी है  आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है । बांग्लादेश का हाल भी कुछ ऐसा ही है । बांग्लादेश के ज्यादातर

हिस्सों में या तो साल भर बारिश का माहौल रहता है या फिर बाढ़ का पानी भरा रहता है । ऐसे स्थिति को देखते हुए बंगलादेशियो ने तैर ने वाली खेती को विकसित किया । इस तरह की खेती को

vegetable floating garden या सब्जी के तैरते बिस्तर कहते है । सिर्फ बांग्लादेश ही नही भारत के ओडिशा में भी इस तरह की तैरती हुई खेती “floating farming” की जा रही है ।

यहाँ से आप और अधिक जानकारी प्राप्त करे

How to make floating farms – तैरते हुए खेत कैसे बनाये

तैरते हुए खेत बनाने के लिए इतनी हल्की चीज़ का इस्तेमाल करना होता है जो पानी वे आसानी से तैर जाए । ऐसी चीज़ के लिए इस्तेमाल किया गया बांस की लकड़ी ओर आम तौर पर देखी जाने

वाली पानी के ऊपर उगी हुई जलखुम्ब का । बांस या किसी प्रकार की हल्की लकड़ी ओर जलखुम्ब के इस्तेमाल करके बेड यानी बिस्तर तैयार करते है । इस बेड की लंबाई 15 से 50 मीटर तक और

चौड़ाई 1.5 से 2 मीटर तक होती है । इसकी मोटाई 0.6 से 0.9 मीटर तक रख सकते है । इस तरह की खेती में किसी भी तरह के उर्वरक या पौध संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं की

आवश्यकता नही होती । क्योंकि जलखुम्बी की कंपोस्ट बहुत उपजाऊ होती है । जहां पर आप floating farm बना रहे है । वहां पानी की गहराई 1 मीटर या उससे ज्यादा होनी जरूरी है ।

How to make a floating bed – तैरते हुए बिस्तर कैसे बनाये

एक बांस या या लंबाई वाली लकड़ी ले कर उसको जलखुम्बी पर रख दीजिए । फिर जलखुम्बी को दोनों ओर से लकड़ी के ऊपर बराबर रखते जाये । जलखुम्बी को तब तक ऐसे रखते रहे जब तक

आपके पैर पानी से ऊपर न आ जाये । इसके बाद पूरे 10 दिन तक इस बिस्तर को सूखने के लिए छोड़ दे और 10 दिन बाद एक और परत ऐसे ही चढ़ाये ।

How to prepare for the plant – पौध के लिए तैयारी कैसे करें

जब आप बिस्तर का चबूतरा तैयार करने में लगे हो तभी इसके लिए पौध भी लगाना शुरू कर दें । उसके लिए आप पुरानी जलखुम्बी का सड़ा हुआ हिस्सा निकल ले और खुम्बी के मोटे हिस्से को निकाल कर अलग कर ले । बस उसी के गोले से बना कर उसमें बीज लगाए ।

सावधानी:-

  • बतख ओर चूहे इन बीजों को निकाल कर नष्ट कर सकते है इसलिए उनका विशेष ध्यान रखे ।
  • बरसात में इनका बाह जाने का डर रहता है उससे भी इनकी सुरक्षा करनी पड़ेगी

Planting plant – पौध रोपण

बुआई के 10 या 12 दिन बाद पौध तैयार हो जाने पर जो बिस्तर आपने तैयार किये है उन पर 20 – 25 सेंटीमीटर की दूरी पर दरांती या किसी भी सुविधा जनक चीज़ से गढ़ा बनाते जायें । बिस्तर के

नीचे से खुम्बी के सड़े हुए हिस्से को ऊपर रखते जाए और उसे पर एक एक करके पौध लगते जाए जब पौधे अपने आकार में आने लगते है बढ़ने लगते है तो उनके बड़े होने के साथ साथ उनका वजन

भी बढ़ने लगता है । जिसके कारण जलखुम्बी का सड़ा हुआ हिस्सा बाहर आने लग जाता है उसको आप उठा कर बिस्तर पे पौधे के चारों तरफ सावधानी से रख दें । जिससे पौधे को मजबूती मिलेगी ।

Which crop can you do – कौन कौन सी फसल कर सकते है

Floating Farms बेड पर आप सब्जियो और मसालों की खेती कर सकते है । बेल वाली फसल भी ऊगा सकते है । इस तरह की Farming Technology के माध्यम से आप

खीरा, करेला, तोरि, घीया, ककड़ी, बींस, बैंगन, टमाटर, मूली, शलजम, प्याज, लहसुन, चौलाई, जैसी बहुत सी फसलों को ऊगा सकते है और मुनाफा भी कमा सकते है ।

Conclusion:- Floating Farms

Floating Farms In India Farming Technology | अगर आप भी ऐसी जगह रहते है जहाँ बरसात ज्यादा होने के कारण पानी जमा रहता है या मीठे पानी के स्त्रोत आपके आस पास बहुत से है तो आप भी Floating Farms के माध्यम से फसल ऊगा सकते है ।

“धन्यवाद”

Agriculture in India

Rose flowers farming give big income

By | 11th January 2019
rose flowers

Rose flowers farming give big Income | कैसे आप गुलाब के फूलों की खेती करके लाखों का मुनाफा कमा सकतें है। इसके बारे में जानकारी के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

गुलाब अपने रूप रंग और सुगंध की वजह से पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है । कहीं गुलाब प्रेम का प्रतीक बनता है तो कही दोस्ती का कही गुलाब सुंदरता को बढ़ाता तो कही महक से वातावरण को महकता है ।

बहुत से गुणो को खुद में अपनाये हुए गुलाब की मांग भी उसके गुणो की तरह ही है बहुत अधिक ।

गुलाब का वैज्ञानिक नाम रोजा है और इसके परिवार की पहचान रोजेसी शब्द से होती है । पूरे विश्व

मे गुलाब के फूलों और गुलाब के तेलों की बहुत बड़ी मांग है । अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुलाब को प्रथम स्थान प्राप्त है ।

आमतौर पर गुलाब के पौधे की लंबाई जमीन से 6 फूट तक हो जाती है । भारत मे गुलाब की खेती महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक की जाती है ।

kaise Kare Gulab ki kheti

व्यावसायिक रूप से गुलाब की खेती की कामयाबी उसकी क़िस्मों पर निर्भर करती है । आधुनिक तकनीकी दौर में खेती के लिए विभिन प्रकार उपलब्ध है । जिनके द्वारा खेती करके किसान ज्यादा उपज वो भी कम खर्च में ले सकता है ।

ग्रीनहाउस तकनीक के द्वारा गुलाब की खेती करना बहुत अधिक फायदेमंद माना गया है । इस विधि के द्वारा फूलो की पहचान अलग ही बनती है ।

गुलाब के पौधों और फूलो को ओर भी बहुत सी विधियों के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है ।

जैसे कि :-

  • खुले क्षेत्र
  • ग्रीनहाउस
  • पॉलीहाउस
  • इंडोर
  • छत पर

आइ ये जानते है गुलाब की खेती के लिए किसी जलवायु पर्याप्त मानी गयी है ।

Climate for rose farming | जलवायु

वैसे तो गुलाब के पौधे को आप हर तरह की जलवायु में उग्गा कर फूल प्राप्त कर सकते है । लेकिन वैज्ञानिक ढंग से अगर खेती करने जा रहे है तो नियमो का पालन करना बेहद जरूरी है ।

15℃ से 30℃ तक का तापमान गुलाब के खेती के लिए अनुकूल माना गया है । गुलाब के पौधे को दिन में 6 घंटे की धूप मिलनी आवश्यक है ।

मृदा की स्थिति – Soil condition Rose Flowers farming

6 से 6.5 PH गुणवत्ता वाली मिट्टी व्यावसायिक रूप से गुलाब की खेती के लिए उत्तम मानी गयी है।

रेतीली दोमट मृदा जिसकी उच्च कार्बोनिक पदार्थों वाली गुणवत्ता हो गुलाब के खेती के लिए

प्राथमिक दी गयी है । क्योंकि इस प्रकार की मिट्टी में गुलाब के पौधे अच्छी तरह से विकसित होते है।

Land preparation | भूमि की तैयारी

चाहे कोई भी फसल हो अच्छी उपज के लिए सबसे पहला कदम भूमि की तैयारी पर निर्भर रहता है

भूमि की तैयारी में खेत की जुताई से पहले 300 या 400 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी

कंपोस्ट खाद एक एकड़ भूमि के लिए उपयोग करे खेत की अच्छी तरह से जुताई करले ताकि पिछली फसल के अवशेष ओर खरपतवार मिट्टी में

मिलकर नष्ट हो जाये । खेत को तीन या चार बार अच्छी तरह से जोते ताकि मिट्टी के उपजाऊ अंश पूरी तरह से सतह पर आ जाये ।

Rose Flowers varieties | गुलाब की किस्में

पूरे विश्व में गुलाब की कई प्रकार की किस्में देखने को मिलती है । इनके रंग भी भिन्न होते है । गुलाब

की व्यावसायिक किस्में जिनका पूरे साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फूलो के बाजार में अच्छी मांग रहती है ।

भारत मे गुलाब की किस्में इस प्रकार है ।

  1. मिनिएचर रोजेज: इसे बेबी गुलाब या परी गुलाब के नाम से भी जाना जाता है । यह मुख्य रूप से गुलदस्ते बनाने और सजावट में उपयोग किया जाता है । यह पॉट और छतों या फिर बालकनियों की सोभा बढ़ाने में भी उपयुक्त है ।
  2. फ्लोरिबनडस : इसे हइब्रिड पोलिथेन्स के रूप में भी जाना जाता है । ये सीधे बढ़ते है जिसके कारण इनको पर्वतारोही का नाम भी दिया गया है ।
  3. बोरबॉन रोजेज : इस किस्म को रीयूनियन गुलाब के रूप में भी जाना जाता है ।
  4. चाइना रोज : यह वर्तमान के लोकप्रिय गुलाब कस पूर्वजो के रूप में जाना जाता है ।
  5. पोलिंथस : ये गुलाब आम तौर पर बोने होते है । इनके छोटे छोटे फूलो के विशाल समूह बनते है ।
  6. मल्टीफ्लोरा रामबलर्स : यह राम्बलर्स ग्रुप का है । इसका उपयोग बाढ़ के लिए दीवारों को ढकने के लिए किया जाता है ।

Rose Flowers Farming – नर्सरी की तैयारी

गुलाब के पौधे को दो अलग क्रियाओ द्वारा उगाया जा सकता है बीज के द्वारा और कलम के द्वारा ।

बीज के द्वारा गुलाब के पौधे को उगाने में समय लगता है और बहुत कम उम्मीद होती है बीज से पौधे के निकलने की

सबसे अच्छी और सरल विधि रहेगी कलम से पौधे तैयार करना ।

कलम के द्वारा पौधे तैयार करने के लिए सबसे पहले नर्सरी के लिए जगह निश्चित कर ले फिर निश्चित

जगह की मिट्टी को फंगस से बचने के लिए उपचार करे । उसके बाद तैयार भूमि में 25cm. ऊंचाई

वाले और 2फूट की चौड़ाई वाले बैड तैयार करले । गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद जरूर भूमि में

इस्तेमाल करे ये जल्द फुटाव में मदद करेगी ।

बैड पर कलम लगाने के लिए दूरी के विशेष ध्यान रखे

60cm. की दूरी कलम से कलम की बनाये रखे ।

4 से 6 इन्च कलम को भूमि में जाने दे और आस पास की मिट्टी को हल्के से दबा दे ।

सिंचाई का भी विशेष ध्यान रखे नर्सरी में सिंचाई के लिए जल का छिड़काव सबसे बेहतर रहेगा

इसलिए फवारे का इस्तेमाल करके समय समय पर सिंचाई करे । ध्यान रहे नर्सरी में पानी का

ठहराव न हो अधिक पानी आने पर निकशी का विशेष प्रबंध हो ।

इस विधि के द्वारा जल्द ही कलम पौधे का आकार ले लेगी ओर आप खेत में इसकी रोपाई कर सकोगे ।

अगर बाहर से पौधे को ख़रीदते है तो 20 रुपये तक खरीद पड़ सकती है नही तो किस्म पर निर्भर करता है ।

नर्सरी विधि को नवंबर माह से लेकर जनवरी माह तक कभी भी कर सकते है

Implantation rose flowers | एक एकड़ भूमि के लिए रोपण क्रिया

तैयार किये खेत मे रोपाई के लिये पौधे से पौधे की दूरी 2फूट. और लाइन से लाइन की दूरी 3फूट

रखे । रोपाई करने का सही समय दोपहर बाद का रखे रोपाई करने के तुरंत बाद सिंचाई का प्रबंध करे ।

irrigation system | सिंचाई प्रणाली

Technology विज्ञान के इस दौर में सिंचाई के बहुत से तकनीक उपलब्ध है ।

जैसे कि :- Rose Flowers Farming

  1. ड्रीप तकनीक
  2. माइक्रो जेट तकनीक
  3. बेसिन तकनीक
  4. फुवाहरा तकनीक

अन्य फूलो के मुकबाले गुलाब को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है । गुलाब की खेती के

लिए फुवारा तकनीक काफी कारगर मानी गयी है । इस विधि से गुलाब की फसल पर सिंचाई करने

से बहुत सारे लाभ भी प्राप्त होते है । Rose Flowers Farming

शुरुआत में गुलाब के पौधे को सिंचाई की आवश्यकता 2 या 3 दिन के अंतराल पर पड़ती है उसके

बाद 7 दिन और फिर नमी बनाए रखने की आवश्यकता होती है ।

Rose plant pruning |पौधों की छटाई

फसल में पैदावार लेने ले साथ उसका ख्याल रखना भी एक अहम हिस्सा है । गुलाब के खेती में

पौधों की छटाई एक अहम हिस्सा है जो कि साल में एक बार करना जरूरी है ।

इसके लिए यही समय नवंबर और दिसम्बर माह सही मन गया है ।

गुलाब की छटाई से निकलने वाली सखाओ से आप ओर अधिक पौधौं की नर्सरी भी तैयार कर

सकते है जिसको आप आस पास के या किसी भी इक्छुक किसान को देकर धन कमा सकते है ।

Something special about rose plants | कुछ विशेष बातें गुलाब के पौधे के बारे में

  • गुलाब का पौधा हर मौसम फुल देता है
  • इसकी एक बार रोपाई करने के बाद 15 साल तक आप फूल प्राप्त कर सकते है ।
  • इसकी विशेष किस्म से गुलाब का तेल भी प्राप्त होता है ।
  • गुलाब की सुगंध मन को शांत करके तनाव मुक्त करती है ।
  • रोज वाटर एक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
  • प्रेम और शांति का प्रतीक है गुलाब ।
  • इसकी पंखुड़ियों के उपयोग से सौंदर्य को निखारा जा सकता है ।
  • गुलाब के पौधे में बीमारी जल्दी नही आती
  • काँटेदार पौधा होने के कारण इसको जंगली जानवर नही खाते ।
  • ये हर प्रकार के मौसम को झेल सकता है ।

Diseases and pests | गुलाब के पौधे में लगने वाले रोग और किट

किट सूची :

  • Aphids
  • Two- spotted mite
  • Thrips
  • Rose Slugs
  • Caterpillars
  • Curculio beetles
  • Japanese beetles
  • Scale insects
  • Leaf cutting bee
  • Nematodes
  • Rose chafer
  • Metallic flea beetles

रोगों की सूची : Rose Flowers Farming

  • Crown gall rot
  • Black spot
  • Powdery mildew
  • Downy mildew
  • Rust
  • Anthracnose
  • Grey mould
  • Verticillium wilt
  • Soorymoulds
  • Canker
  • Nematodes
  • Rose mosaic
  • रोज wilt
  • Rose rosette disease

Reference : wikipedia

Solution | उपाय Rose flower

चाहे कुछ भी हो आपको रसायनों का प्रयोग गुलाब के पौधे पर नही करना है ।

सिर्फ जैविक ढंग से तैयार मिश्रण का प्रयोग करके ही रोगों की रोकथाम आसानी से की जा सकती है । उसके लिए

Method of organic pesticides | जैविक कीटनाशक बनाने की विधि (Rose Flowers Farming)

गौमूत्र लेकर उसमें अदरक, लहसुन, नीम का तेल, तम्बाकू, धतूरा के साथ मिलाकर किसी मिट्टी के

घड़े में डाल कर ऐसी जगह पर जमीन में दबाये जहां हर वक़्त छाया रहती हो । फिर पूरे एक माह

के बाद निकाल ले आपको जैविक कीटनाशक तैयार मिलेगा । किसी भी किस्म के रोग और किट को खत्म करने की क्षमता इसमें होती है ।

Rose flower harvesting | गुलाब के फूलों की कटाई

पहले वर्ष में गुलाब के फूलो की पैदावार थोड़ी कम रहती है । जब पौधे पर फूल खिलते है और वो अपना पूरा आकार ले लेते है तो इनको तोड़ लिया जाता है । गुलाब के फूलों का रंग उनकी किस्म के ऊपर निर्भर करता है ।

गुलाब के फूलों को तोड़ने के तुरंत बाद पानी में डाल दिया जाता है ताकि इनकी ताज़गी बरकरार रहे ज्यादा तर फूलों को सुबह जल्दी तोड़ना सही रहता है । व्यावसायिक रूप से फूलों की तोड़ाई बाजार की दूरी पर निर्भर करती है ।

ठंडे स्थान पे रखने के लिए इनको 2℃ से 5℃ तक तापमान की आवश्यकता होती है । आधिक समय तक ताज़ा बनाये रखने के लिए गुलाब के फूल को एक या दो पतों के साथ तोड़े ।

गुलाब के फूलों के तेल की अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत 20 लाख रुपये तक मिलती है और राष्ट्रीय स्तर पर 2.5 लाख से  4 लाख तक

Rose Flowers Farming – खुले गुलाब को बाजार में 2000 रुपये प्रति किल्लो की दर से बेचा जाता है ।

भारत मे गुलाब की खरीद के लिए बड़े बाजार जो प्रसिद्ध है बंगलोर, कोलकता, पूणे और दिल्ली में है ।

Benefits Of Rose Water | गुलाब जल के फायदे

  • आंखों के लिए अमृत माना जाता है गुलाब जल : थकी हुई आंखों को तुरंत राहत देता है गुलाब जल । आंखों के गुलाब जल के इस्तेमाल से आंखों में नई चमक आती है । अगर आप घंटो कंप्यूटर के सामने काम करते है तो गुलाब जल आपका दोस्त साबित हो सकता है ।
  • गुलाब के तेल में एस्ट्रिजेंट : इसमी एस्ट्रिजेंट के अद्भुत गुण होते है जो मसूड़ो ओर बालो की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है । साथ ही यह तवचा की देखभाल, मांशपेशियों में मजबूती, आंतो ओर रक्त वाहिकाओं में भी मदद करता है ।
  • त्वचा की देखभाल : गुलाब जल त्वचा में विषमता पैदा करने के कारण त्वचा की देखभाल के लिए बहुत लोकप्रिय है । यह एक सर्वश्रेष्ठ टोनर के रूप में भी लोकप्रियता रखता है । रोज रात को चेहरे पर लगाने से त्वचा में कसावट आती है ।
  • बालों की देखभाल : इसमें बालो की देखभाल के प्रभावी गुण है । बालो की जड़ों में ब्लड सर्क्युलेशन में सुधार करता है । बालो को मजबूत और लचीला बनाता है । ये एक प्रभावी और प्राकृतिक कंडीशनर भी है ।
  • गुलाब फल : विटामिन ए, बी3, सी, डी और ई से भरपुर होता है गुलाब फल । विटामिन सी की उचमात्रा के कारण गुलाब फल के द्वारा डायरिया का इलाज किया जाता है ।
  • हर्बल चाय : गुलाब जल का इस्तेमाल हर्बल चाय ले रूप में किया जाता है । यह पेट के रोग और मूत्राशय में होने वाले संक्रमण को दूर करने का काम करता है । हर्बल गुलाब चाय एक शांत प्रभाव प्रदान करती है ।

Conclusion | निष्कर्ष Rose Flowers

Rose Flowers Farming Give Big Income | तो देखा आपने कितने फायदे देता है एक गुलाब अब तो आप समझ गए होंगे कि कितना जरूरी है गुलाब की खेती करना और खेती से होने वाली आमदनी का भी आपने अंदाज़ा लगा लिया होगा ।

तो अब देर न करते हुए ये जानकारी अपने प्रिय दोस्तों तक भी पहुंचाओ Share Krke Facebook, twitter, whatsapp माध्यम से ।

“धन्यवाद”

Beneficial insects control farming technology

By | 8th January 2019
Beneficial insects

Beneficial Insects Control Farming Technology – क्या फायदा है मित्र कीटों से कौन से मित्र किट Insects फायदा पहुंचाते है क्या है Beneficial Insects की पहचान, कैसे करे सुरक्षा Beneficial Insects मित्र कीटों की ये सब बातें जाने गे इस लेख के माध्यम से Beneficial Insects Control Farming Technology

जैविक(Organic) किट प्रबंधक – Beneficial Insects

ये बात हम सभी जानते है के फसलो को नुकसान पहुंचाने वाले कीटो को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है ।

लेकिन कुछ किट ऐसे भी होते है जो फसलो को नुकसान पहुंचाने की वजाय फायदा करते है । जिसे हम मित्र किट कहते है ।

Beneficial insects
Beneficial insects control farming technology

Beneficial Insects को लेकर एक रिपोर्ट

फसलो को सबसे अधिक हानि कीटों से पहुंचती है । इनसे उत्पादन में तो कमी आती ही है बल्कि गुणों में भी अभाव आता है ।

वे किट जो हानिकारक कीटों को खा कर फसल की सुरक्षा करते है उनको मित्र किट कहते है।

इसके अतिरिक्त वे किट जो विशेष पदार्थ प्रदान करते हैं उनको मित्र किट कहते है ।

मधु मक्खी जो कि कठिन परिश्रम करके फूलों से नेक्टर एकत्रित करके मधु एवम मोम पैदा करती है ।

इसी तरह से रेशम का किट विशेष प्रकार की पत्तियों को खाके रेशम का धागा पैदा करता है ।

लाख का किट विशेष वृक्ष से लाख बनाता है ।

Beneficial Insects – इन कीटों में कई गुण पाए जाते है ।

ये हानिकारक कीटों को खोजने में सक्षम होते है ।

किसी जीव विशेष पर पोषण के लिए आश्रित होते है ।

इनमे तीव्र प्रजनन की क्षमता होती है ।जिससे ये अपनी संख्या में कम समय में संख्या वृद्धि करने में सक्षम होते है ।

इन कीटों के जीवन चक्र होता है और ये वातावरण के अनुसार ढल जाते है । दुश्मन के विष का इन पर प्रभाव नही होता ।

Beneficial insects
Lady Bug
किट प्रबंधन की विधियां

अजैविक किट प्रबंधन:- इस विधि में बिना जीव के किट प्रबंधन किया जाता है ।

जैसे कि :- Beneficial Insects

  • किट रसायनों का प्रयोग
  • उपयुक्त सस्य किर्याओं का फसल उगाने में प्रयोग
  • किट अवरोधी प्रजातियों को उगाना
  • अंतर फसलीय पद्धति को अपनाना
  • सूत्रकृमि के नियंत्रण के लिए खेत के चारों तरफ या मेंड़ पर गेंदा उगाये ये अपनी जडो द्वारा ऐसा पदार्थ पैदा करते है जिससे सूत्रकृमि या तो मर जाते है या चले जाते है ।
Beneficial insects
Honey Bee
किट प्रबंधन में प्रोयोग में आने वाले किट – Beneficial Insects

किट प्रबंधन के लिए किट रसायनों का प्रयोग न केवल अधिक खर्चीला होता है

बल्कि कई प्रकार का प्रतिकुल प्रभाव जल, भूमि, जीव जंतुओं पर पड़ता है ।

अतः परजीवी ओर परभक्षी कीटों के प्रयोग कम खर्च वाला और प्रदूषण रहित होता है ।

निष्कर्ष

Beneficial Insects Control Farming Technology –यहाँ आप समझ गए होंगे कि हर तरह के किट नुकशान दायक नही होते बल्कि कुछ किट फसलो के लिए हितकारी भी होते है । लेकिन अगर फसलो को नुकसान देने वाले कीटों से फसलों को बचाना है तो कृषि विशेषग्यो की सलाह जरूर ले ।

More Information Here

Beneficial insects
Short Head
Beneficial insects
Beauty Adult Bee

Thankyou

You can follow us by click on Facebook, Instagram, Whatsapp

Kadaknath chicken benefits

By | 8th January 2019
kadaknath chicken benefit

स्वागत है आपका | Kadaknath chicken benefits को जानने के लिए आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़े। यहाँ जानकारी दी गयी है Kadaknath chicken benefits के बारे में जो आज भारत के अलावा विदेशो में भी बहुत चर्चा में है। कड़कनाथ मुर्गा व्यापार और सेहत दोनों को फायदा पहुंचा रहा है लेकिन कैसे आइये जाने।

Kadaknath chicken benefits

कड़कनाथ मुर्गे का व्यापार करके लाखों का फायदा ले सकते है । chicken को खाना एक आम बात है

लेकिन कड़कनाथ चिकन की तो बात ही अलग है । बहुत से लोग तो इसके लिए दूर दूर तक जाते है।

अभी इसकी संख्या कम होने के कारण लोगो को ये परेशानी उठानी पड़ रही है।

लेकिन सरकार द्वारा चलाये गए अभियान के चलते कड़कनाथ लोगो तक आसानी से उपलब्ध हो पायेगा।

बहुत से लोग तो इसके लिए दूर दूर तक जाते है।

अभी इसकी संख्या कम होने के कारण लोगो को ये परेशानी उठानी पड़ रही है।

लेकिन सरकार द्वारा चलाये गए अभियान के चलते कड़कनाथ लोगो तक आसानी से उपलब्ध हो पायेगा।

कड़कनाथ | Kadaknath chicken benefits

कड़कनाथ मध्य्प्रदेश के झाबुआ जिले के जो आदिवासी है उनके द्वारा पाली जाने वाली मुर्गे की एक प्रजाति का नाम है।

इसको स्थानीय भाषा मे काली मासी भी कहा जाता है ।

इसका ये नाम सिड इसलिए पीडीए क्योंकि इसका रंग भी कला होता है और मांस भी काला होता है ।

इसका मांस खाने में बेहद स्वादिष्ट होने के साथ साथ अनेक रोगों में लाभकारी भी है ।

देश मे ही नही विदेशों में भी इसकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है ।

अगर इसका पोलट्री फार्म शुरू किया जाए तो ये एक बढ़िया आमदनी का  जरिया बन सकता है ।

क्योंकि इसका मांस और अण्डे बहुत अच्छे दाम पर बिकते है।

kadaknath chicken benefit

Identity of Kadaknath | इसकी पहचान के बारे में जान लीजिए

इसकी पहचान है इसका काला रंग इसके शरीर का हर हिस्सा काला होता है जीभ, मांस, हड़िया, पंख, अण्डे सब ।

इसके अंडे काले या भूरे रंग के होते है ।

Category | इसको तीन श्रेणियों में बांट सकते है

पहली श्रेणी है zed black जैसा कि नाम में ही पता चल रहा है ये पूरी तरह से काला होता है ।

दूसरी श्रेणी है Pencil इस श्रेणी वाले मुर्गे के पंखों पर pencil नुमा सफेद धब्बे होते है ।

तीसरी श्रेणी है Golden kadaknat  इस श्रेणी के मुर्गे के शरीर पर गोल्डन रंग के धब्बे दिखाई देते है ।

अगर इसका पोल्ट्रीफार्म बनाना चाहते है तो उसके लिए कुछ जरूरी बातें जान ले ।

Kadaknath chicken business शुरू करने में कुछ जरूरी बातें

पोल्ट्रीफार्म में अगर आप 100 चिकन रख रहे है तो उसके लिए आपको 150 वर्गफीट जगह की आवश्यकता होगी।

शुरुआत के लिए पोल्ट्रीफार्म की जगह गांव या शहर से दूर होनी चाहिए ध्यान रहे में रोड भी नजदीक न हो तो अच्छा है ।

पोल्ट्रीफार्म को ऊंची जगह पर बनाये ताकि किसी भी प्रकार से पानी अंदर न जाये ।

बिजली का विशेष प्रबंध हो ।

खाने पीने के बर्तन साफ सुथरे हो । दो या तीन दिन के अंतराल पे बर्तनों की सफाई जरूर करे ।

खाने का विशेष प्रबंध रखे रात में इनको खाना न दे ।

शेड में हर श्रेणी के लिए अलग स्थान निश्चित करके रखे ।

रोशनी ओर हवा का विशेष प्रबध रखे ।

Where to pick poultry for poultry farming | पोल्ट्रीफार्म के लिए मुर्गे कहाँ से ले

kadaknath chicken benefit

इसकी मांग अधिक होने के कारण ओर संख्या कम होने के कारण एक दम से ये आपको सायद न

मिल पाए । हो सकता है आपको एक साल के लिए इन्तेजार ही करना पड़े ।

इसके लिए आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे हो सकता है वो आपको इसके मुर्गे जल्दी उपलब्ध करा दे ।

अगर आपके आस पास कोई इस जाति के मुर्गे फार्म में रखता है तो आप उनसे संपर्क करे हो सकता है वही से आपका काम बन जाये ।आप ऑनलाइन भी इसके चूज़े खरीद सकते है । एक काम जरूर करे अगर आप ये काम शुरू करने जा रहे है तो एक बार किसी संस्था या फार्म पे जा कर इसके बारे में  प्रशिक्षण जरूर ले ।

अच्छी जानकारी ले कर अच्छी तरह से जब आप ये काम शुरू करेंगे तो मुनाफा भी अच्छा ही होगा ।

Kadknath chicken से जुड़ी रोचक बातें

इसमे अंडे की डिमांड अधिक होने के कारण अंडे की कीमत 25 रुपये से लेकर 100 रुपये तक चली जाती है।

एक मुर्गे की कीमत 1000 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक होती है ।

मध्यप्रदेश के झागुआ जिले का जो कृषि विज्ञान केंद्र है वहां के वैज्ञानिकों ने क्रिकेट के खिलाड़ियों को kadknath मुर्गे का मांस खाने की सलाह दी है ।

क्योंकि इसका मांस अन्य मांस के मुकाबले काफी स्वास्थ्यवर्धक होता है ।

छतीशग़ढ़ ओर मध्यप्रदेस में इस बात को लेकर झगड़ा है के ये उनके यहां की नस्ल के है ।

ये भारतीय नस्ल के मुर्गा है इसमे रोग बहुत कम लगते है ।

जो अकाल ग्रस्त इलाके है उनकी जीविका का ये एक अच्छा साधन बन चुका है ।

व्यवसाय के लिए तो ये फ़ायदेमंद है ही उसके साथ जो मांस खाने वाले लोग है ये उनके लिए भी बेहद फायदेमंद है ।

क्योंकि सफेद चिकन के मुकाबले इसमे कोलेस्ट्रॉल कम होता है ओर एमिनो एसिड बहुत

ज्यादा होता है प्रोटीन की मात्रा इसके मास में भरपूर पाई जाती है ।

इसके मास में अक्षय रोग,सुगर, दमा व माइग्रेन जैसी बीमारियों में आराम पहुचने की क्षमता पाई गई है ।

90 के दसक में कड़कनाथ प्रजाति हो गयी थी विलुप्त

जी हां ये बात बिलकुल सच है के कड़कनाथ मुर्गे की नस्ल विलुप्त होने की कगार पे ही थी ।

कुछ लोग इसको बचाने की कोशिश में लगे हुए थे पर कामयाबी नही मिल पा रही थी ।

फिर भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे NAP प्रोग्राम के तहत इस प्रजाति को जोड़ा गया और इसकी संख्या बढ़ाने के लिए काम शुरू किया गया ।

कृषि विज्ञान केंद्र वैज्ञानिको ने जब इसके बारे में पूछताछ की तो लोगो ने बताया के इस जाति की मुर्गे वो काफी समय से पाल रहे है

ना तो जन मुर्गो का वजन बढ़ता है और न वो ज्यादा दिन जिंदा रहते है ।

अच्छी तरह से परीक्षण करने के बाद पता चला के खुराक सही न मिलने और टीकाकरण न होने के कारण ऐसा हो रहा था

फिर जब इस प्रॉजेक्ट पर वैज्ञानिको द्वारा काम किया गया तो 4 महीने के अंदर ही उनको बहुत

बढ़िया नतीजे देखने को मिले और kadknath chicken की जाती में वृद्धि होने लगी ।

kadaknath chicken benefits

Earning | मुनाफा कितना है kadknath poultry farming से

अगर कोई 100 मुर्गे का पोल्ट्रीफार्म शुरू करता है तो वो भी 4 महीने के अंदर 1 लाख रुपये आराम से कमा रहा है ।

यही आंकड़ा अगर एक साल का लगाए तो 300000 लाख रुपये सालाना बनेगा जोकि एक बहुत अच्छी आय होगी ।

Conclusion | निष्कर्ष

Kadaknath chicken benefits | यहाँ मैंने आपको पूरी जानकारी देने की कोशिश की है।

फिर भी अगर कोई बात रह जाती है तो मैं जल्द ही जानकारी अपडेट करने की कोशिश करूंगा।

अगर आपका कोई सुझाव या सवाल है तो आप कमेंट के माध्यम से हमसे पूछ सकते है।

आप हमसे Facebook , Instagram , Whatsapp के माध्यम से भी जुड़ सकते है।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ जरूर देखे

“धन्यवाद”

chilli farming business plan | मिर्च की खेती के राज

By | 7th January 2019
chilli farming business plan 2019

chilli farming business plan Green | हरि मिर्च की खेती करके लाखों रुपये कैसे कमाए। Chilli Farming एक बहुत ही प्रसिद्ध मसालों में गिनी जाने वाली फसल है। Chilli Farming कैसे करे क्या करना होगा हरी मिर्ची को उगाने के लिए। Green chilli farming business plan के लिए कौन सी किस्म रहेगी अच्छी। कितनी आएगी लागत और कितना होगा मुनाफा chilli farming business plan Green 2019

Is chilli farming profitable? | क्या मिर्च की खेती लाभदायक है?

किसान मिर्च की खेती मुख्यत नगदी फसलो के रूप में करते है । इसकी खेती से किसान बहुत अच्छा मुनाफा कमाता है । एक एकड़ में लगभग 90 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक आमदनी हो जाती है । chilli farming बहुत लाभदायक साबित होती है अगर इसको सही समय पर वैज्ञानिक ढंग से पूरी जानकारी के साथ किया जाए।

chilli farming business plan 2019

दुनिया की नंबर एक ट्रेक्टर कंपनी के बारे में जानकारी के लिए यहाँ जाए

किसान जीवन शैली  हमेशा से  चर्चा का विषय रहा है अधिक जाने

विभिनता के आधार पर मिर्च की उगायी जाने वाली किस्मो को पांच भागों में बांटा जाता है ।

  1. पहली – कैप्सिकम फुटमैन्स
  2. दूसरी – कैप्सिकम ऐनुएम
  3. तीसरी – कैप्सिकम पैंडुलम
  4. चौथी – कैप्सिकम चाईनीज
  5. पांचवी – कैप्सिकम प्यूबेसेन्स

Main Varieties | मुख्य किस्में

  • पूसा ज्वाला : इसके फल लंबे व स्वाद में तीखे होते है । ये किस्म जल्दी तैयार हो जाती है । एक एकड़ में सुखी मिर्च 18 से 22 किवंटल तक कि पैदाव्वार देती है ।
  • कल्याणपुर चमन : इसका फल लम्बा ओर तीखा होता है ये शंकर किस्म होती है। इसकी पैदाव्वार प्रति एकड़  28 से 30 किवंटल सुखी प्राप्त होती है ।
  • कल्याण पुर चमत्कार : इसके फल लाल और तीखे होते है ये भी एक शंकर किस्म है ।
  • कल्याणपुर 1: इस किस्म से 20 किवंटल तक पैदाव्वार प्राप्त होती है और ये 215 दिन के लगभग तैयार हो जाती है ।
  • कल्याणपुर 2 : ये किस्म 210 दिन लेती है तैयार होने में ओर इसकी पैदावार 17 किवंटल तक प्रति एकड़ की है ।
  • सिंदूर : इस किस्म को तैयार होने में 180 दिन का समय चाहिए और ये 14 से 15 किवंटल तक कि पैदावार देती है प्रति एकड़ से ।
  • भाग्यलक्ष्मी : इस किस्म को हर तरह के जलवायु के लिए सक्षम माना जाता है । ये सिंचाइ की सुविधा सही रूप से न होने पर भी मुनाफा देती है पैदावार अच्छी देती है । सिंचाई के अभाव वाले क्षेत्र में इसकी पैदावार क्षमता 15 क्विंटल तक है और सिंचाई वाले क्षेत्रों मे 19 क्विंटल तक है ।
  • पंजाब लाल : ये एक बारामासी किस्म है । इसमे दूसरी किस्मो के मुकाबले रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। इसकी उपजाऊ शक्ति लाजवाब है ये एक एकड़ में 45 से 50 क्विंटल तक कि पैदवार देती है ।

मिर्च की भारत मे ओर भी बहुत से किसमें मौजूद है। जिनको ऊगा कर किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते है । यहां में एक बात कहना चाहूंगा किस्म का चुनाव करने से पहले एक बार अपने नजदीकी कृषि केंद्र में जाकर जरूर सलाह ले ।

What Session and Climate Best for Chilli Farming | अनुकूल समय और जलवाय

वैसे तो मिर्च किसी भी जलवायु को सह लेती है पर पैदावार के लिए सबसे अच्छी सर्द ऋतु रहती है । अधिकतर किस्में 7℃ के तापमान में खुश रहती है ।

Soil selection | मृदा का चुनाव (chilli farming business plan )

दोमट मृदा सर्वोत्तम मानी गयी है अन्यथा जुगाड़ तो भारत में प्रसिद्ध है ही कही भी उगालो नई तकनीक को अपना कर । काली मिट्टी में भी मिर्च अच्छी पैदावार देती है । जल की निकाशी का विशेष ध्यान रखे खेत का चुनाव करते समय । जल का अधिक समय तक ठरना फसल को नुकसान पहुंचा सकता है ।

Farm preparation | खेत की तैयारी (Chilli Farming Business Plan )

खेत की जुताई ऐसे करे कि मिट्टी भूरभूरी बन जाये । 3 या 4 बार जुताई कर के पर मिट्टी की दशा सही हो जाएगी ।

Seed sowing for the plant | पौध के लिए बीज की बुआई

अगर सर्द ऋतु में बुआई करे तो january के महीने सबसे उत्तम रहता है । ग्रीष्म ऋतु के लिए जून ये जुलाई माह सही रहता है ।बीज की बुआई में विशेष ध्यान बीज के उपचार का करे इसके लिए एग्रोसन जी.ऐन. या थीरम या फिर कैप्टन 2 ग्राम रसायन प्रति किल्लो ग्राम बीज की दर से उपचारित करे ।एक एकड़ के लिए पौध प्राप्त करने में 1.25 से 1.50 किल्लो ग्राम बीज की जरूरत होगी ।

बीज कैसे बुआई करे | Chilli Farming Business Plan

सबसे पहले बीज की क्षमता के हिसाब से एक कियारी का आकार निश्चित कर ले । फिर कियारी को खरपतवार नाशक से उपचारित करें । कियारी इस प्रकार से तैयार करे कि उसमें 2 फिट चौड़े आकार वाले पटे निकाल ले उसका ये फायदा मिलेगा की कियारी में जल की निकशी बेहतर हो जाएगी अधिक बरसात होने पर भी पौधे को नुकसान नही पहुंचेगा । अब लाइन बना कर 1” दूरी पर बीज रखे और बाद में मिट्टी या खाद से ढक दें ।ऊपर से पराली या किसी भी फसल के अवशेष के साथ ढक दें । जब पौधे मिट्टी से बाहर आने लगे तो पराली को ऊपर से हटा दें ।सिंचाई का विशेष ध्यान रखे नर्सरी में पानी हल्के से फवारे से ही डाले ।

Plant transplant | पौध रोपाई (Chilli Farming Business Plan)

बीज से रोपाई के लिए पौधा कुल 35 दिन में तैयार हो जाता है ।रोपाई में पौधे से पौधे के दूरी 45cm. ओर लाइन से लाइन की दूरी 60cm. तक रखे ।

chilli plants diseases | खाद एवं उर्वरक (Chilli Farming Business Plan)

chilli farming business plan 2019

एक एकड़ के लिए (Chilli Farming Business Plan)

  • गोबर खाद या कंपोस्ट खाद 300 क्विंटल
  • 100 किल्लो ग्राम नाईट्रोजन
  • 50 किल्लो ग्राम फास्फोरस
  • 60 किल्लो ग्राम पोटाश

की आवश्यकता होती है । कंपोस्ट, फस्फोर्स, पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपाई के पहले खेत की तैयारी के समय डाले । नाईट्रोजन के शेष भाग को दो बार मे डालना है । पहला भाग रोपाई के 40 दिन बाद ओर दूसरा भाग 90 दिन के बाद देना सही रहता है।

सिंचाई के लिए जरूरी बातें:- सर्दी के मौसम में तो नमी बनी ही रहती है इसलिए पानी की कम आवश्यकता पड़ती है । गर्मी के दिनों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है । तो ध्यान रखे पोधो में नमी बनाए रखे । गर्मी के मौसम में लगभग 7 से 10 दिन के अंतराल में सिंचाई करे ।

Green harvesting peppers | हरि मिर्च की तुड़ाई

अगर आपको हरि मिर्च से बाजार में भाव ज्यादा मिल रहा है। तो तुड़ाई शुरू करे जब आपको लगे कि मिर्च अपना पूरा आकार ले चुकी है तो तोड़ ले । तुड़ाई के समय विशेष ध्यान रखे कि झटके से फूलों के ऊपर कोई असर न जा रहा हो फूल झड़ न रहे हो इसलिए थोड़ा सावधानी से तोड़े ।

Red harvesting peppers | लाल मिर्च की तुड़ाई

आपको खुद पता चल जाएगा के मिर्च तोड़ने के आकार में आ चुकी है पूरी तरह से पक कर लाल हो चुकी है ।

How do you take care of a chili pepper plant?

Things to note | ध्यान देने वाली बातें

  • मिर्च की फसल से पूरी तरह फल लेने के बाद आप पोधो को आगे के लिए भी सुरक्षित रख सकते है । जो कि एक मुनाफा देता है ।
  • अधिक पैदावार लेने के लिए चरों को साफ सुथरा बना कर रखे । उनमे खरपतवार को उभरने ना दे ।
  • किसी भी तरह का किट या रोग लगने पर सुरक्षा बचाव करें ।
  • बीमारी की समझ न पड़ने पर बीमार पौधे को कृषि विज्ञान केंद्र ले जाये ।
  • पूरी तरह से विष मुक्त खेती करे organic farming
  • सिंचाई के समय पानी की मात्रा अधिक न करें नही तो आये हुए फूल झड़ने लगे गे ।
  • फसल को वैज्ञानिक ढंग से करे न कि पारम्परिक ढंग से ऐसा करने से कम लागत में अधिक मुनाफा होगा ।
  • किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र की जलवायु को ध्यान में रख कर करे ।
  • फसल को शुरुआत से लेकर अच्छी निगरानी में रखे ।ऐसा न हो कि आपकी फसल किसी रोग की चपेट में आ जाये और आपको पता भी न चले ।
  • तुड़ाई करने के तुरंत बाद हाथों को साबुन के साथ अच्छी तरह से साफ कर के सरसो के तेल को हाथों पर लगाये ।ताकि आपको हाथों पर किसी तरह की जलन का सामना ना करना पड़े
  • बाजार ले जाने के लिए तोड़ी गयी मिर्च की बोरी में भरे ओर ध्यान रखे बोरी के ऊपर किसी किस्म का दबाव न आये ।
  • रोग ग्रस्त पौधे को तुरंत उखाड़ ले और फसल से दूर ले जाकर दबा दे या जला दे ।

Conclusion | निष्कर्ष

chilli farming business plan Green 2019 के माध्यम से मैंने आपको मिर्ची की फसल की शुरुआत से लेकर अंत तक की सभी बातें बताई है।

अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमे कमेंट या ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते है।

किसी भी प्रकार की फसल के बारे में जानकारी पाने के लिए हमे ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते है।

“धन्यवाद”

Commercial Jasmine Farming As Profitable Farming Business Idea

What Is Digital Marketing?

Onion farming money making 90 days

By | 7th January 2019
Onion Farming

Onion farming money making 90 days | करे वैज्ञानिक तरीके से लाखों रुपये कमाये। अगर हम वैज्ञानिक तरिके से प्याज की खेती करते है तो बहुत से पैसे कमा सकते है वो भी 90 दिन में। यहाँ आप जाने गे प्याज की खेती के फायदे, प्याज की खेती वैज्ञानिक तरीके से कैसे करे, Onion Farming में आने वाली दिक्तें और उनके उपाय।

Onion farming money making 90 days

मुख्य सब्जियों में गिनी जाने वाली सब्जियों में से एक है प्याज। Onion को किसी भी सब्जी में मिला दिया जा ये

तो उसका स्वाद दोगुना हो जाता है। Onion विभिन प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है। सिंचाई की सुविधा अगर बेहतर है तो Onion Farming आसानी से की जा सकती है।

अपने इस लेख के माध्यम से हम किसान भाइयों को जानकारी देंगे कि वैज्ञानिक तरीके से प्याज की

खेती[Onion Farming] करके किसान कैसे लाखों रुपये कमा सकते है वो भी कम लागत में ।

सबसे पहले मेरा किसान भाइयों से निवेदन है के वैज्ञानिक ढंग से organic खेती ही करे। अधिक जहरीले कीटनाशकों का उपयोग न करे।

Onion farming in scientific way | प्याज की खेती वैज्ञानिक तरीके से कैसे करे

एक बात ध्यान देने वाली है यहां जो कि है खेती के प्रकार

जो कि दो प्रकार है

  1. पारम्परिक ढंग से की जाने वाली खेती।
  2. वैज्ञानिक ढंग से की जाने वाली खेती ।

पारम्परिक ढंग को वैज्ञानिक ढंग में बदलना जरूरी हो गया है । क्योंकि अब न तो वो जलवायु रही और न ही वो भूमि जिसमे हमारे पूर्वज खेती किया करते थे।

वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के बहुत से फायदे होते है किसान को जिनमे से एक है कम लागत में अधिक पैदावार।

Onion[प्याज] के दाम से सभी किसान अच्छी तरह से वाकिफ है।

प्याज को अगर अन्य किसी राज्य में बेचने जाए तो अच्छे दाम भी प्राप्त कर सकते है।

प्याज की खेती अगर वैज्ञानिक ढंग से करे तो कम लागत में बहुत अच्छा धन कमा सकते है।

इस खेती को करने के लिए कुछ नियमो का पालन करना बहुत जरूरी है।

जिनमे से सबसे पहली बारी आती है जलवायु की Onion Farming

Onion Farming

स्टेविया की खेती करके 10 लाख रुपये सालाना कमा सकते है किसान

सिर्फ 45 दिन में धनिया की खेती से कमाए लाखों रुपये

ऐसी सुविधाएं जो हमें कुदरती रूप से फायदें देती हैं

Appropriate climate for onion crop | प्याज की फसल के लिए उपयुक्त जलवायु

हर प्रकार की जलवायु में प्याज की खेती संभव है पर जो अच्छी मानी गयी है वो है ना अधिक ठंड हो और न अधिक गर्मी ।

लगाते समय तापमान 20℃

फसल पकने के समय तापमान 30-35℃ तक सही माना गया है।

Soil types | मृदा कैसी होनी चाहिए

5.8 से 6.5 के पी.एच. मान ओर हल्की दोमट मृदा प्याज की फसल के लिए बेहतर माना गया है।

एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए जहां आप प्याज की फसल उगाने जा रहे है वहां सूर्य का प्रकाश अच्छी तरह से पहुंचे।

Onion variety | प्याज की किस्मे

  1. सफेद रंग वाली किस्म के प्याज इस किस्म को उषा व्हाइट, उषा राउंड, उषा फ्लैट नामो से जाना जाता है।
  2. पीले रंग वाली किस्म:- इस किस्म को अर्ली ग्रीन , ब्राउन स्पेनिश के नाम से जाना जाता है।
  3. लाल रंग के प्याज :- ये किस्म बहुत अच्छी मानी गयी है इसको उषा माधवी, उषा रेड, पंजाब सिलेक्शन, अग्रि फाउंड डार्क रेड, अग्रि फाउंड लाइट रेड अर्क निकेतन  ये सभी नाम लाल रंग प्याज की अलग अलग नाम है।

Good manure for onion | अच्छी खाद

  • गोबर की खाद 300 से 350 क्विंटल एक एकड़ भूमि के लिए
  • नाइट्रोजन 80 किल्लो ग्राम प्रति एकड़
  • फास्फोरस 50 किल्लो ग्राम प्रति एकड़
  • पोटाश 80 किल्लो ग्राम प्रति एकड़

सबसे पहले गोबर की खाद को निश्चित मात्रा के तहत खेत की जुताई करने से पहले भूमि में डाल दे।

फिर खेत की अच्छी प्रकार से जुताई करे। ताकि खाद पूरी तरह से मिट्टी में मिल जाये ।

पोटाश ओर फस्फोर्स की पूरी मात्रा ओर नाईट्रोजन की आधी मात्रा खेत की अंतिम तैयारी के समय या फिर पौध रोपाई के समय डाले ।

नाईट्रोजन को दो बार में भूमि में डाले

Farming

पहली रोपाई के 30 दिन बाद ओर दूसरी खुराक 45 दिन के बाद।

ऐसा करने से फसल को नाईट्रोजन की कमी नही होगी।

Irrigation system | सिचाई की व्यवस्था

सभी फसलो में अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, ठीक इसी प्रकार प्याज की फसल भी है ।

प्याज की फसल चक्र को पूरा करने में 10 या 12 सिंचाई की आवश्यक्ता पड़ती है।

ठंड के मौसम में 15 दिन के अंतराल पे

गर्मी के मौसम में 7 दिन के अंतराल पे सिंचाई की आवश्यक्ता होती है ।

Point of attention | ध्यान देने वाली बात

अगर फसल पकने के समय पत्ते पिल्ले रंग में ढलने लगे ।

तो सिंचाई न करे ओर पत्तो के सूखने का इन्तेजार करें ।

जैसे ही पत्ते सुख जाए प्याज को भूमि से निकालने की विधि शुरू करें।

खरपतवार को नष्ट करना है जरूरी :- आगर फसल से पैदावार चाहिए बढ़िया तो उसका ध्यान भी रखना बहुत जरूरी है।

Farming

खरपतवार ऐसी चीज है जो दूसरी फसल को उभरने नही देती इसलिए इसका उपचार फसल लगाने से पहले ही कर दे ।

बाजार में बहुत से खरपतवार नाशक उपलब्ध है फिर भी अपने नजीदीकि कृषि केंद्र में एक बार जरे

संपर्क करे ताकि आपको एक अच्छी सलाह मिल सके ।

Control of kit and disease | किट और रोग का नियंत्रण

किसी भी फसल में लगा लो कीटों ओर रोगों पर नियंत्रण पा कर ही आप एक अच्छी पैदावार ले सकते हो ।

ऐसा ही प्याज की फसल Farming में भी करना है ध्यान रखे किसी भी तरह का किट या रोग आपके प्याज की फसल में न पनपने दें ।

इसमे होने वाले कुछ मुख्य रोग और उनके लक्षण इस प्रकार है।

Disease | बैगनी रोग

इस रोग में पत्तियों के ऊपर सफेद से धब्बे शुरुआत से ही बनने शुरू हो जाते है । इनके बीच का भाग बैंगनी रंग का होता है ।

यह रोग अगर बढ़ने लगे तो पतियों से प्याज की गहराई तक फैल जाता है ।

ऐसा होने से भंडारण के ऊपर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है ।

इस रोग से प्याज Onion के गलने की सम्भावना अधिक बढ़ जाती है ।

इससे बचने के उपाय के लिए फफूंद नाश दवा जैसे copper oxychloride का इस्तेमाल कर सकते है अन्यथा

आप प्याज के पौधे को कृषि केंद्र ले जाकर डॉक्टरी सलाह ले बिना सलाह के आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है

ऐसे ही किसी कीटनाशक दवा का उपयोग न करे।

Kit | किट

इस फसल में वैसे तो किसी प्रकार के किट लगने की संभावना बहुत कम होती है लेकिन

फिर भी कुछ छोटे आकार के किट इसकी पत्तियों को खुर्च कर रास का आनंद लेने के लिए आ जाते है ।

इनसे निपटने का एक बड़ा ही सरल और कारगर उपाय है नीम के तेल का छिडकाव करे।

last trip of the onion crop | प्याज की फसल की अंतिम यात्रा

ख़ुदाई जब आपको लगे कि प्याज की प्याजी यानी पत्तियां सुख कर जमीन पर लेट गयी है ।

तब प्याज को जमीन से बाहर निकालना शुरू कर दें।

ध्यान रहे के प्याज कटे नही अगर ऐसा होता है तो आपको बाजार में कीमत को लेकर भारी

नुकसान उठाना पड़ सकता है ।

Onion Farming Full Report 2019

Conclusion | निष्कर्ष

“जिसने खाया नही प्याज उसको आया नही स्वाद”

Onion farming money making 90 days |प्याज एक गुणकारी सब्जी है जिसका इस्तेमाल बहुत सी दवाओं के लिए भी किया जाता है । यहां मैने आपको प्याज की रोपाई से लेकर बाजार ले जाने तक कि सभी बातें बता दी है । फिर भी अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं ।

“धन्यवाद “

World No.1 Tractor Company John Deere 2019

By | 6th January 2019
World No.1 Tractor Company John Deere 2019

World No.1 Tractor Company:- John Deere World No.1 Tractor Company ऐसा क्या किया इस Company ने की ये World की No.1 Tractor Company बन गयी। कौन सी ख़ास बात बनाती है John Deere Tractor Company को World की No.1 Tractor Company भारत में क्या अहमियत रखती है World No.1 Tractor Company John Deere क्या लक्ष्य है World की No.1 Tractor Company का किसानो और Technology के प्रति। आइये समझने की कोशिश करते है इन सब बातों को।

अगर देखा जाए तो पूरे संसार में बहुत सी ट्रेक्टर कम्पनिया मौजूद है और ऐसा नहीं है के वो अपने उत्पादों को अच्छा नहीं बनती। दूसरी कम्पनिया भी

अपने व्यापार का विस्तार करने के लिए उत्पादों को बेहतर से बेहतर बनाती है। वो भी अपने उत्पाद के लिए सभी नयी टेक्नीकी साधनो का उपयोग

करते है। भारत में सबसे ज्यादा ट्रेक्टर बिक्री करने वाली कंपनी महिंद्रा भी तकनिक के क्षेत्र में पीछे नहीं है। अब तक की सबसे ज्यादा ट्रेक्टर बिक्री करने वाली कम्पनियों में से पहले स्थान पर नाम आता है महिंद्रा का।

लेकिन यहाँ John Deere ही विश्व की No. एक कंपनी क्यों है।
आइये समझने की कोशिश करते है इन सब बातों को।

John Deere World No.1 Tractor Company की लोकप्रियता

World में John Deere Tractor सबसे लोकप्रिय अंतर्राष्ट्रीय फार्म ट्रैक्टर ब्रांड्स में से एक है और आजकल इसकी बहुत मांग है। जॉन डीरे कृषि मशीनरी, उपकरण और ट्रैक्टर उपकरण भी प्रदान करता है।

किसान भाइयो निम्बू की खेती से कैसे आप लाखों रुपये कमा सकते है।

जॉन-डीरे-ट्रैक्टर्स इस ब्रांड में कंबाइन, फोरेज हार्वेस्टर, कॉटन पिकर, गन्ना हार्वेस्टर, सीड ड्रिल, फिल्ड स्प्रेयर, टेलीस्कोपिक हैंडलर, खाद स्प्रेडर और विभिन्न अन्य कृषि उपयोगिताओं जैसी अन्य कृषि मशीनें हैं।

यह कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका (यू.एस.), यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, फ्रांस, भारत, जर्मनी, इटली, पोलैंड, मैक्सिको, तुर्की जैसे विभिन्न देशों में 1000 लोगों को रोजगार देती है। प्रशासनिक केंद्र इलिनोइस में स्थित है।

World No.1 Tractor Company John Deere 2019

John Deere Company की स्थापना

डीरे एंड कंपनी की स्थापना 1837 में हुई, यह एक फॉर्च्यून 500 कंपनी है और यह 2016 के यूएस $ 26. 64 बिलियन के राजस्व के साथ कृषि, निर्माण और वानिकी उपकरणों की दुनिया की अग्रणी निर्माता कंपनी है,

जानकारी गेंहू की फसल के बारे में शुरुआत से लेकर कटाई तक

किसान को रोटावेटर से फायदे के बारे में पूरी जानकारी यहाँ देखे

वर्ष 2016 में 1.52 बिलियन अमेरिकी डॉलर की शुद्ध आय। 2016 में R & D पर 1.39 बिलियन अमेरिकी डॉलर।

भारत में John Deere Tractor Company की शुरुआत

डीरे एंड कंपनी ने 1997 में लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के साथ एक संयुक्त उद्यम पर हस्ताक्षर किए।

4 अगस्त, 1998 को सानसवाड़ी में महत्वाकांक्षी 112 एकड़ भूमि पर Green Project की नीव रखी गई।

6 अक्टूबर 2000 को फ्रेड कोरंडोर्फ-राष्ट्रपति द्वारा दुनिया भर में एजी, डीरे एंड कंपनी द्वारा उद्घाटन किया गया

5000 श्रृंखला के ट्रैक्टरों के लिए कला विनिर्माण सुविधा की स्थिति
एक एकीकृत भाग वितरण केंद्र के साथ घरेलू और निर्यात के लिए एकल विनिर्माण लाइन

5310 भारत में बेचा गया पहला ट्रैक्टर मॉडल था

सन 2000-2002 तक John Deere Tractor Company 110 देशो में प्रसार करने लगी।

अब भारत में इनका मुख्या मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पुणे में है।

सन 2005 में technology सेंटर India शुरू किया गया।

सन 2007 में modern & Hi-tech in house product testing सुविधा शुरू की ।

इसके बाद सन 2012 में सरहिंद कार्य क्षेत्र की सहायता के द्वारा W50 और W70 कंबाइन हार्वेस्टर का निर्माण किया गया।

उसी वर्ष 2012 में Electronic Solution विभाग का निर्माण हुआ।

सन 2013 में John Deere Financial India Private Ltd. की शुरुआत हुई।

2014 में इंडिया पार्ट डिस्ट्रीब्यूशन सेण्टर शुरुआत हुई जो की पुणे नागपुर में स्थापित किया गया।

सन 2015 नयी तकनीक के साथ 5E AC Cab Tractor को उत्तारा गया।

इसका इस्तेमाल खास तौर पर लोडर के लिए किया गया। जो की बहुत ज्यादा कामयाब रहा।

वर्ष 2016 तक कंपनी ने 5 लाख ट्रेक्टर को सेल कर दिया। ये एक बहुत अच्छा आकड़ा रहा

इसके लिए कंपनी को सम्मानित भी किया गया Best Performance in all categories 

JD Power Award 2016 के द्वारा।

भारत में John Deere Tractor लोकप्रियता का कारण

सबसे लोकप्रिय ट्रेक्टर 5310 के बारे में पूरी जानकारी यहाँ दिए गए वीडियो के माध्यम से प्राप्त करे।

विश्व स्तरीय इंजन की गुणवत्ता वाले ये ट्रेक्टर किसानो के दिलों में जगह बनाने में सफल रहे।

क्यूंकि यहाँ किसानो ने वो पाया जो दूसरी ट्रेक्टर कंपनी ना दे पायी

इंजन की लाजवाब ताकत अधिक इस्तेमाल करने के बावजूद भी ट्रेक्टर के प्रदर्शन में तनिक भी

कमी का ना पाया जाना। ऐसा इसलिए संभव हुआ।

क्यूंकि John Deere Tractor Company World की No.1 Technology से लेस्स

मशीनो के इस्तेमाल के द्वारा ट्रेक्टर के हर एक पुर्जे निर्माण करती है

जिसके अंतर्गत किसी भी तरह गुणवत्ता से समझोत्ता नहीं किया जा सकता।

ईंधन यानि तेल की बचत ट्रेक्टर में दिए गए auto controler आयल मैनजमेंट सिस्टम

के माध्यम से प्रदर्शन दौरान तेल की काफी बचत होती है।

जॉन डेरे की नयी “D” सीरीज के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए के लिए।

एक मजबूत ढांचा देता है आपको लम्बे समय तक बहुत कम खर्च यानी जीरो मैंटनेंस

John Deere Tractor World No.1 Company इसके बारे में आप यहां दिए गए वीडियो के माध्यम से जानकारी प्राप्त करें।

Conclusion | निष्कर्ष

World No.1 Tractor Company John Deere | क्या आपको मेरे इस लेख के माध्यम से कुछ जानकारी प्राप्त हुई है। क्या यहाँ दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट है। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगे तो दोस्तों के साथ facebook के माध्यम से जरूर शेयर करें।

धन्यवाद