Monthly Archives: October 2018

farmer life style-किसान जीवन शैली

By | 31st October 2018
farmer life style-किसान जीवन शैली
farmer life style-किसान जीवन शैली
farmer life style-किसान जीवन शैली

farmer life style-किसान जीवन शैली  हमेशा से  चर्चा का विषय रहा है। समय में बदलाव के साथ साथ किसान  शैली  में भी काफी बदलाव आये है। जैसा की आप सब जानतें है। सहर और गाँव दोनों में रहन सहन के तोर तरिके अलग अलग नजर आते है। सहरीकर्ण तेजी से बढ़ती आबादी के साथ बहुत सारे बदलावों को झेलता आया है। यही हाल गाँव का भो रहा है। तो आइये चर्चा करते है, गाँव में रहने वाले किसान रहन सहन के बारे में। 

Bhartiya kisan (farmer life style-किसान जीवन शैली)

भारतीय किसान यानी के भारत के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला एक ऐसा इंसान जो पुरे देश का पेट भरने के लिए अपने खेत में फसल उगाता है ताकि सभी को अन्न की प्राप्ति हो। लेकिन इस बात को कोई अहमियत नहीं देता की अन्न दाता कैसे जीवन व्यतीत करता है। कैसे पालन करता है अपने परिवार का। क्या अन्न दाता  को कोई  कठिनाई होती है। क्या अन्न दाता अपने सपनो को पूरा कर पता है।

आइये जान ने की कोशिश करते है के किसान कौन है और उसकी जीवन शैली कैसी रही ,

Who is the farmer-किसान कौन है

किसान एक इंसान है बस क्या इतना कहना काफी होगा भारतीय किसान के बारें में नहीं किसान वो है

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

  • जो धरती का सीना चीर कर अनाज पैदा करता है ,
  • जो खुद भूखा रह कर भी देश का पेट भरता है ,
  • माटी की खुशबू से जिसका जीवन मैहकता है ,
  • प्राकृति की गोद में जिसका जीवन पलता है ,
  • तपती धुप में भी अकेले काम करता है ,
  • जो आँधियों से लड़ कर मुकाम हासिल करता है 
  • बारिश की बूंदो में खुशियों को बहा देता है 
  • जो कड़ाके की ठण्ड को सलाम ठोक कर चलता है 
  • जिसके खून पसीने की दास्ताँ ब्यान एक एक अन्न का दाना करता है 
  • जो माटी से शुरू होकर माटी में ही जा मिलता है ,

ये होता है किसान अब बात करते है हरित क्रांति से पहले किसान का रहन सहन कैसा था। 

Inspiration for the life of the farmer

अन्न दाता यानि किसान का जन्म से ही एक उद्देश्य होता है खेत में अन्न उत्पन करके देश की सेवा करना।

किसान की जीवन  शैली  

किसान की जीवन शैली शुरुआत से ही बहुत ही साधारण रहा है। गाँव का खुशहाल वातावरण  किसान के जीवन के लिए प्रेरणा दायी रहा है। 

Farmer’s dress

उसका कार्य कृषि करके अन्न पैदा करना होता है। किसान का पहनावा एक दम सादा होता है धोती कुर्ता सर पे पगड़ी और हाथ में लाठी लिए जोकि अन्न दाता की पहचान बन  चूका है। 

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

एक किसान की सुबह होते ही वो अपने सहायक मित्र पशुओ को चारा डालता है। उसके साथ उसकी पत्नी भी जग जाती है। पशुओ को चारा देने के बाद किसान को सीधा अपने खेत की याद आती है, और वो अपने काम पे निकल पड़ता है अपनी आँखों में आशा की किरणों को भरके की अब की बार फसल अच्छी होगी तो कुछ अनाज बाजार में बेच कर अपने परिवार के लिए नए कपडे खरीदूंगा और  बच्चों के लिए मिठाई।   

अपने सपनो को भूल कर (farmer life style-किसान जीवन शैली)

किसान अपने सपनो को भूल कर परिवार और देश की सेवा में ही अपने सुख का अनुभव करता है। कृषि में सहायक पशु किसान के अनोखे मित्र होते है। ये विभिन्न प्रकार से किसान को लाभ देते है। ये भी किसान के जीवन का एक हिस्सा है।

पशुओ को भी घर के साथ बनने बाड़े में रखा जाता था। आज़ादी से पहले गाँव में सभी कच्चे मकान और घास फूस से बनी झोपड़ियों में ही जीवन व्यतीत करते थे। घर और आँगन की धरती को गोब्बर से लीपा जाता था। आँगन में तुलसी का पौधा लगा कर उसकी पूजा की जाती थी। 

अपने जीवन की बहुत कम और छोटी छोटी सी जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता था किसान पहले खाने के लिए संघर्ष बहुत अधिक करना पड़ता था। बस ऐसे ही मिल जूल कर किसान अपना जीवन व्यतीत करता था आज़ादी से पहले। 

Hard work-कठिन परिश्रम 

Conclusion

आज़ादी से पहले किसान के जीवन के बारें में मेरे द्वारा दी गयी जानकारी  आपको कैसी लगी जरूर बताये 

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Natural resources-प्राकृतिक साधन

सरदार वल्लभ भाई पटेल के ये 10 विचार आज भी रगों में भर देते हैं जोश

“धन्यवाद्”

Natural resources-प्राकृतिक साधन

By | 29th October 2018
Natural resources-प्राकृतिक साधन
Natural resources-प्राकृतिक साधन
Natural resources-प्राकृतिक साधन


Natural resources-प्राकृतिक साधन – ऐसी सुविधाएं जो हमें कुदरती रूप से फायदें देती हैं। जिन्हे हम अपने आप पास फैली वनस्पति से प्राप्त क्र सकते हैं। 

क्या है प्राकृतिक साधन(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

जल ,वायु , अगनि , मृदा , प्रकाश , वनस्पति , पर्वत , मित्र किट ये सब प्राकृतिक साधन है। 

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

कौन से प्राकृतिक साधन आते थे काम किसान के

जल :- जल किसान और कृषि के लिए अति आवश्यक प्रकृतिक साधन रहा है। जल के बिना फसल उगाना नामुमकिन है। जल एक ऐसा प्राकृतिक साधन है जिसको मानव स्वयं नहीं बना सकता। पृथ्वी के 75 % भाग पर जल ही जल है।

बाकि का बचा 25 % भाग मानव के रहने की जगह, कृषि के लिए, पर्वतों के लिए, वनस्पति के लिए है। जल एक द्रव्य पदार्थ होता है जिसे हम देख सकते है, छू सकते है और पी सकते हैं। जल एक पारदर्शी द्रव्य पदार्थ है।

you know जल में बहुत सारे गुण होते है जो मानव शरीर के साथ साथ फसल ,अन्य प्राकृतिक वनस्पति और सभी जीवों के लिए अनिवार्य है।

जल के प्राप्ति स्त्रोत :- जल को पृथ्वी पर भूमिगत रूप से नदियों के द्वारा पर्वतों से गिरते झरनो और आकाश से बरसात  के द्वारा  प्राप्त  किया जा सकता है। 

जल किसान की कृषि में कैसे मदद करता है(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

है जल तो नाम से एक द्रव्य पदार्थ लेकिन जल की हर वस्तु हर जीव को अति आवश्यक्ता है जल के बिना सब कुछ निरार्थ हो जाता है। अब मानव शरीर को ही देखलो मानव शरीर के 75 फीसदी हिस्से में जल का ही अहम स्थान है।

अगर कोई इंसान जल का प्रयोग करना छोड़ दे तो वो कुछ समय तक ही जीवित रह सकता है ठीक इसी प्रकार कृषि में फसल को भी जल चाहिए अगर जल न मिले तो हम एक बीज को भी अंकुरित नहीं कर सकते। फसल को दरुस्त रखने के लिए सही खनिज पदार्थ पोधो के तनो में पहुंचाने के लिए जल अति आवश्यक है।

इसलिए कृषि के क्षेत्र में भी जल को अहम स्थान प्राप्त है। सिंचाई का नाम दिया गया है इस स्थान को।

क्या थे सिंचाई के साधन

मशीनीकरण से पहलेकिसान केपास वर्षा और नदियां सिंचाई के लिए प्राकृतिक साधन थे। ये दो साधन सिंचाई में कैसे काम आते थे।  आइये जान लेते है। 

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

नदियां :- मनुष्य इस पृथ्वी पर रहने वाला एक बुद्धिजीवी है। जो अपनी मानसिक सोच के माध्यम से अपनी जरूरतों को पूरा करता है। किसान ने अपनी कृषि से जुडी जरूरतों को देखते हुए सिंचाई के लिए नदियों के पास के मैदानों में कृषि करने का लाभ समझा और सिंचाई के लिए नालों का निर्माण किया जिनके द्वारा सिंचाई  के लिए पानी को कृषि क्षेत्र तक पहुँचाया जाता था।

तो ऐसे किसान ने नदियों के जल से प्राकृतिक रूप से सिंचाई की। नदिया  किसान के लिए सिंचाई का एक अच्छा स्रोत बनी लेकिन नदियों से दूर के मैदानों में कृषि वर्षा पर निर्भर थी आइये जाने कैसे।

वर्षा :- नदियों से अलग मैदानों में कृषि पूरी तरह वर्षा पर निर्भर करती थी। वर्षा ऋतू में ही किसान खेत में बीज बोता था ताकि बीज अच्छी प्रकार से अंकुरित हो सके। अंकुरित होने के कुछ दिन बाद पौधे को सिंचाई की जरूरत पड़ती थी।

जिसमे किसान सिवाए वर्षा के इंतजार के  कुछ नहीं कर सकता था। इस प्रकार किसान अपने इस प्राकृतिक साधन से सिंचाई करता था।

प्राकृतिक साधन जो किसान के लिए जरूरी है आज भी (Natural resources-प्राकृतिक साधन)

मृदा :- मृदा कृषि के क्षेत्र में किसान के लिए पहला चुनाव है। क्यूंकि कृषि पूरी तरह मृदा पर ही आधारित है। मृदा भारत में हर जगह अलग अलग तरह की पायी जाती है।

किसान ने मृदा के प्रकारों को फसल के अनुसार बाँट रखा है जिससे किसान को कृषि करने में सुविधा महसूस होती है। मृदा का उपजाऊ स्तर कम होने पर किसान वनस्पति का सहारा लेता था। आइये जाने कैसे

वनस्पति :- वनस्पति प्राकृतिक रूप से उगी हुई झाड़ियां पौधें वृक्ष होते है। जब किसान की मृदा की उपजाऊ शक्ति कम होने लगती थी तब वो हरी खाद के लिए वनस्पति का सहारा लेता था। मृदा में हरे पोधो पत्तो को मिला कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता था।

तो इस प्रकार वनस्पति भी किसान के काम आती रही है। वनस्पति के पोषण का मुख्या स्त्रोत सूर्य का प्रकाश होता है जो की किसान के लिए भी बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

सूर्य का प्रकाश (Natural resources-प्राकृतिक साधन)

Sun Light-सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का मुख्या स्त्रोत है चाहे मानव हो या फिर कोई भी पौधा सूर्य के प्रकाश से भरपूर मात्रा में विटामिन डी को प्राप्त कर के अपने आकर में वृद्धि कर सकता है।

सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाला विटामिन डी मानव के शरीर में हडियों के विकास में बहुत ज्यादा सहायक सिद्ध होता है ठीक इसी प्रकार पेड़ पोधो में भी सूर्य के प्रकाश से वृद्धि की क्षतमा को बढ़ावा मिलता है और किसान को फसल में इस तरह  फयदा होता है।

मित्र किट :- मित्र कीट फसल को दो प्रकार से फायदा पहुँचातें है आंतरिक रूप से और बाहरी रूप से आंतरिक रूप से फायदा देने वाले मित्र किट मृदा के अंदर रहने वाले सूक्ष्म जीव होते है। जो की मिटटी को उपजाऊ बनाने की क्रिया को सुचारु रूप से बनाये रखते है।

सूक्ष्म किट(Natural resources-प्राकृतिक साधन)

ये सूक्ष्म किट मिटटी को कठोर होने से रोकते है। मिटटी में वायु संचार की प्रकिर्या को बढ़ावा देते है। जिसके कारण फसल को पोषण की प्राप्ति होती है। फसल की पैदावार में वृद्धि होती है। इन जीवो के अलावा एक केंचुआ नाम का जीव भी मिटटी को उपपजाउ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

बाहरी रूप से फसल को फायदा देने वाले मित्र कीट मिटटी की ऊपरी सतह पर रहते हैं।  ये भोजन करने के बाद जो भी मल त्याग करते हैं। उसका पोषण मिटटी के द्वारा पौधों को प्राप्त होता है। जिसकी वजह से पौधे का विकास होता है।   

प्राकृतिक साधन
Conclusion-निष्कर्ष

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Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

By | 29th October 2018
agriculture tech in India
Farmer's health-किसान का स्वास्थ्य
Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य, स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है। कहावत भी है- ‘पहला सुख निरोगी काया’। कोई आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है, जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है। किसान का स्वास्थ्य

पहले किसान स्वयं ही सब काम करता था। शारीरिक मेहनत बहुत अधिक थी। जिसके साथ साथ स्वास्थ्य आज के मुकाबले कई गुना अच्छा था। किसान की खेती प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होने के कारण अनाज में भी पोषण की मात्रा अधिक थी।

शारीरिक रूप से किसान स्वस्थ और मजबूत रहता था। बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जिनसे पहले इंसान मुक्त रहता था और आज बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जो निरंतरता में आ चुकी हैं। ऐसी बीमारियां जो हर घर में मिलने लगी है और जो पहले नहीं थी। तो क्या होता है ये स्वस्थ्य आइये जान लेते है। ………

क्या है स्वास्थ्य(Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य)

स्वास्थ्य शब्द दो शब्दों को मिला कर बनता है स्वा और अस्थ्य यहाँ स्वा का अर्थ है स्वयं का और अस्थ्य का अर्थ है अस्थिया यानि हमारे शरीर का ढांचा स्वास्थ्य की तुलना दो प्रकार से की जाती है एक होता है स्वस्थ और दूसरा अस्वस्थ।

  • स्वस्थ :- किसी मानव का स्वयं का शरीर बिल्कुल सही हो और हर प्रकार से काम करता हो तो उस व्यक्ति को स्वस्थ व्यक्ति कहा जायेगा। जिसके तीनों दोष (वात, पित्त एवं कफ) समान हों, जठराग्नि सम (न अधिक तीव्र,न अति मन्द) हो, शरीर को धारण करने वाली सात धातुएं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य) उचित अनुपात में हों, मल-मूत्र की क्रियाएं  भली प्रकार होती हों और दसों इन्द्रियां (आंख, कान, नाक, त्वचा, रसना, हाथ, पैर, जिह्वा, गुदा और उपस्थ), मन और सबकी स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो, तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ कहा जाता है।
  • अस्वस्थ  :- किसी मानव का स्वयं का शरीर पूरी तरह सही ना हो और हर प्रकार के काम करने में सक्ष्म ना हो ,तो ऐसे व्यक्ति को अस्वस्थ व्यक्ति कहा जाता है।

ये थे स्वास्थ्य के प्रकार। इनमे ज्यादा जरूरी है मानव का स्वस्थ रहना चलिए जान लेते है मनुष्य स्वस्थ कैसे रह सकता है। 

स्वस्थ कैसे रहा जाये

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य,

स्वस्थ रहने के लिए हमें अपने जीवन में नियमो का पालन करना चाहिए। 

  • सबसे पहला नियम भोजन पोषण से भरपूर और सही समय पर करना चाहिए  
  • नियमित रूप से व्यायाम या योगासन करना चहिये 
  • स्वास मुँह बंद करके नाक के द्वारा लेनी चाहिए 
  • अपने शरीर की साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए 
  • बाजारू खाने से परहेज करना चाहिए 
  • खुश रहो और दूसरों को भी खुश करते रहना चाहिए 
  • अच्छे कामो को जीवन में अहमियत देनी चाहिए 

किसान के स्वास्थ्य का राज़ 

कठिन शारीरक परिश्रम और संघर्ष भरा जीवन ही किसान के स्वस्थ जीवन का राज़ रहा। 

मशीनी क्रांति आने से पहले कृषि के सभी कार्य किसान शारीरिक परिश्रम करके ही करता था। 

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

जैसे की :- खेत को बिजाई के लिए तैयार करना। ये काम मशीनीकरण से पहले किसान बैलों के द्वारा करता था। बैलों के साथ हल को जोड़ कर किसान स्वयं मार्गदर्शन करता था। चाहे धुप हो या छाव किसान बैलों को दिशा नीरदेश देने के लिए उनके साथ साथ चलता था। जिस कारण किसान की मासपेशियां मजबूत रहती थी। शरीर रोग मुक्त बना रहता था। 

प्राकृतिक साधनो पर निर्भरता के कारण अनाज पोषण से भरपूर होते थे। 

यानि के  किसी भी प्रकार का रसायनिक उर्वरक उस समय फसल में नहीं डाला जाता था। मिटी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक साधनो का प्रयोग किया जाता था जैसे की हरी खाद के लिए पौधों के अवशेष मिटटी में मिला कर पूर्ति की थी। मवेशियों द्वारा प्राप्त मल को खाद में परिवर्तित होने के बाद मिटटी में मिलाया जाता था। इन सब से कोई भी ऐसे तत्व अनाज में नहीं आते थे जो मानव शरीर के लिए हानिकारक हो।   

वातावरण का शुद्ध होना भी एक कारण है 

किसान के शरीरिक रूप से स्वस्थ रहने का

Hard work-कठिन परिश्रम

उद्योगिक क्रांति से पहले हमारा वायु मंडल इतना प्रदूषित नहीं था जितना के आज है। इसलिए किसान का जीवन प्रदुषण मुक्त होने के साथ रोग मुक्त भी रहा। 

Conclusion-निष्कर्ष

बस यही सब वो घटक थे जिनसे किसान का शरीर स्वस्थ बना रहता था 
All these were the components from which the farmer’s body remained healthy

Agriculture And Farmer-कृषि और किसान

Farmer’s health-किसान का स्वास्थ्य

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Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

By | 29th October 2018
Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना
Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना
Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना

Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावनाजैसा की आपने ध्यान दिया होगा की मेरे सभी लेख भारतीय किसान और उसके जीवन शैली से जुडी बात्तों के ऊपर आधारित है। अब तक आप भारतीय किसान के बारें में जितना जान चुकें है। उन सब बात्तों में ये आज का विचार एक अहम भूमिका निभाता है। मेलजोल और एकता की भावना आज का विचारणीय विषय है।

तो क्या है ये मेलजोल और एकता की भावना आइये विचार करते है। …….

मैंने अपने विचारों के द्वारा आप सब को कई दसकों पहले के किसान के जीवन का परिचय कराने की एक छोटी सी कोशिश की है इसमें अगर आपको कहीं भी बदलाव की जरूर महसूस हो तो कृप्या हमें जरूर सूचित करे।

क्या है मेलजोल और एकता की भावना
मेलजोल यानि मिलजुल कर रहना मानव एक सामाजिक प्राणी है जोकि समाज में अन्य स्वरुपियों के साथ रहना सुरक्षित समझता है। ऐसा करने से उसको एक दूसरे को समझने में सरलता होती है।

मेलजोल की भावना बढ़ती थी

ठीक इसी तरह पहले किसान और उसका परिवार मिलकर जीवन व्यतीत करते थे। परिवार के सभी सदस्य अपने काम के साथ-साथ अपने साथी अपने मित्र की भी मदद करते थे। जिसके कारण सब में मेलजोल की भावना बढ़ती थी।

एक दूसरे के सुख और दुख में काम आते थे। ऐसे ही मिलकर रहने और मिल कर एक दूसरे का साथ देने की भावना को मेलजोल की भावना कहते हैं। रहन सहन और काम करने की इस विधि से एक और भावना का जन्म होता है एकता की भावना ये एक ऐसा भाव है जो आपसी मेलजोल को दर्शाता है।

उदाहरण – जैसा की (Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना)

जैसा की आप किसी के पास हर रोज जाना शुरू कर दे या किसी के साथ मिलकर कोई भी काम करना शुरू कर दें तो आप उसके हर विचार को जानने लगते हों जिससे दोनों में और ज्यादा सद्भवना बढ़ेगी। फिर अगर कभी भी दोनों में से किसी एक पर भी कोई मुसीबत आती है तो दोनों प्राणी एक जुट होकर उसका डट कर सामना करते है।

ऐसा करने से उन दोनों में जो भावना दिखेगी उसको एकता की भावना कहतें है। वसे तो मेलजोल और एकता ये दोनों एक ही पहलु है। अगर कोई प्राणी किसी के साथ मेलजोल बनाये रखता है। तो वहां एकता ही दर्शाता है लेकिन समाज इस भावना को सिर्फ मेलजोल की भावना का ही नाम देता है एकता को समाज तब समझता है

Agriculture And Farmer-कृषि और किसान

जब कोई प्राणी समस्या में हो और उसकी समस्या का हल उसके साथी उसके समूह वाले मिलकर करे तो वो एकता का परिचय देते है।

कैसे लाये मेलजोल की भावना

  • तकनिकी साधनो का सही रूप से उपयोग करके
  • एक ऐसा स्थान निश्चित करके जहां मिलकर सब एक दूसरे के साथ विचार विमर्श कर सके
  • भेद भाव को नष्ट करके
  • एक दूसरे की मदद करके
  • परिवार का बंटवारा न करके
  • अच्छा ज्ञान प्राप्त करके

ऐसे बहुत से कारण हैं जिनको हम सुधार में लाकर मेलजोल और एकता को बढ़ा सकते हैं

सबका मिलकर एकजुट होकर रहना(Feeling of harmony and unity-मेलजोल और एकता की भावना)

मशीनीकरण से पहले साधनों की कमी होने के कारण सबका मिलकर एकजुट होकर रहना ही अनिवार्य था। मुझे तो वह जीवन बहुत अच्छा लगता है। अगर आप भी एक बार सोच कर देखें कि कितना अच्छा वह समय था जिसमें हम सब तकनीकी साधनों से दूर मिलजुल कर परिश्रम कर के अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे।

Hard work-कठिन परिश्रम

एक दूसरे के साथ बात करना एक दूसरे का सुख दुख आपस में बांटना मिलकर हंसना मिलकर खाना कितना अच्छा होता अगर आज भी ऐसा ही जीवन व्यतीत करते हम सब। मेलजोल की भावना इंसान को जीने की हिम्मत देती है।

इंसान को दुर्बल होने से रोकती है। इसलिए आज के समय में तकनीक से जुड़ने के बाद इंसान के पास इन सब भावनाओं की कमी सी होने लगी है।

क्या फायदें है मेलजोल और एकता की भावना के :- मेलजोल और एकता की भावना होने से मानव को बहुत से फायदें होंगें

  • समाज में रहना सरल साबित होगा
  • किसी को भी मुसीबत का सामना अकेले नहीं करना पड़ेगा
  • जातिवाद का अंत हो जायेगा
  • समाज पूरी तरह से शिक्षित होगा
  • नारी को सम्मान मिलेगा
  • सब में प्रेम की भावना रहेगी
  • इंसान दयालु बनेगा
  • आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी
  • सब के पास रोजगार होगा
  • नियमो का पालन होगा
  • बस ये ही नहीं बहुत से ऐसे काम हैं जो बिलकुल सरल तरिके से होने लगेंगे देश की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आएगी इतने फायदें होंगें की मैं आपको बता नहीं सकता
  • इस विषय से जुड़ें आपके विचार और प्रशन आप हमारे साथ साँझा कर सकते है उसके लिए आप कमेंट बॉक्स का उपयोग कर सकते है या फिर ईमेल के द्वारा हमारे साथ सम्पर्क बना सकते हैं।
Conclusion-निष्कर्ष

What is Feeling of harmony and unity इस विषय से जुड़ें आपके विचार और प्रशन आप हमारे साथ साँझा कर सकते है उसके लिए आप कमेंट बॉक्स का उपयोग कर सकते है या फिर ईमेल के द्वारा हमारे साथ सम्पर्क बना सकते हैं।

Agriculture before mechanization-मशीनीकरण से पहले कृषि

इस विषय से जुड़ें आपके विचार और प्रशन आप हमारे साथ साँझा कर सकते है उसके लिए आप कमेंट बॉक्स का उपयोग कर सकते है या फिर ईमेल के द्वारा हमारे साथ सम्पर्क बना सकते हैं।

भारतीय कृषि के बारे में यहाँ भी देखे 

Agriculture and farmers

By | 29th October 2018
Agriculture and farmers

Agriculture and farmers | कृषि और किसान का हम सब के जीवन में बहुत महत्व  है। ये दोनों सब के जीवन के हिस्से है।   चलो जाने की कैसे है Agriculture and farmers इंसान के जीवन के हिस्से।

What is agriculture and farmers

इंसान के द्वारा भूमि से जंगल को साफ करके बनाई गयी जगह पर उगायी गयी फसल चक्र के दौरन की गयी गति विधियों को कृषि कहतें है। इन सब गतिविधियों में किसान पशुपालन को भी बढ़ावा देता था। उस समय रासायनिक उर्वरको का कोई नामो निशान भी नहीं था। इसलिए धरती में मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए किसान पशुओं के मल से तैयार खाद और हरे पोधों का उपयोग करता था। 

अब आप  सोच रहे होंगे के इंसान को फसल उगाने की जरूरत क्यों हुई , वैसे तो ये बात सभी को पता होगी की फसल उगाने की जरूरत क्यों पड़ी क्यों करना पड़ा कृषि जैसा काम। चलिए ये भी जान लेते है। 

Why did agriculture work | क्यों करना पड़ा कृषि जैसा काम 

बात शुरू होती है प्राचीन काल से जब हमारे पूर्वज पेट भरने के लिए जानवरों का सिकार कर के मास खाया करते थे, तभी अपने जीवन काल में उन्होंने कुछ ऐसे बीजों की खोज कर ली जिनको इंसान आसानी से खा और ऊगा सकतें थे।

फिर मानव ने उन बीजों को अपने भोजन में शामिल करना शुरू कर दिया। मास के साथ साथ वें इन बीजों को भी खाने लगे। इस प्रकिर्या द्वारा परिवार का भरण पोषण करना इंसान को बेहतर लगने लगा। 

अब आप सोच रहेँ है के बेहतर कैसे लगा तो चलिए ये भी जान लेते है।

Agriculture and farmers-कृषि और किसान
Agriculture and farmers-कृषि और किसान

How the seeds became better food | बीज बेहतर भोजन कैसे बने

जब इंसान ने उगाये हुए बीजों को खाने में शामिल किया तो उनको ये बेहतर लगा सिकार करके मास खाने से ,क्यूंकि सिकार करने के लिए उनको अपना निवास स्थान छोड़ कर दूर जाना पड़ता था। जिसकी वजह से परिवार की सुरक्षा में जोखिम उत्पन होता था।

सिकार करने में बहुत समय लगता था फिर कभी कभी सिकार नहीं मिलने के कारण परिवार को भूखा ही रहना पड़ता था। 

तो बहुत से कारणों को देखते हुए इंसान को बीजों को उगाना ही बेहतर लगने लगा। बीजों को उगाने के बाद एकत्र किया जा सकता था और एकत्र किये हुए बीजों को कभी भी खा सकतें थे। जिससे परिवार में कोई भूखा नहीं रहता था सब का भरण पोषण अच्छे से होने लगा। परिवार की सूरक्षा भी आसानी से की जा सकती थी। 

you must read it | किसान का रहन सहन

धीरे धीरे इंसान ने बीजों को उगाने और इनको भोजन बनाने की भीन भीन प्रकार की विधियों की खोज की और निरंतर बदलाव के चलते आज हमें कृषि के द्वारा अनेक प्रकार के अनाज मिल पाएं हैं जिनको हम अपना भोजन बना रहें हैं।  

और येही वो कारण थे जिनके रहतें इंसान को कृषि में निरंतरता करनी पड़ी। यानी के कृषि जैसा काम करना पड़ा और कृषि मानव के जीवन का एक हिस्सा बन गयी। अब किसान पे विचार करते हैं 

How agriculture and farmers part of human life | कैसे है किसान और कृषि मानव के जीवन का हिस्सा

अगर हम प्राचीन काल से अब तक के कृषि के पेहलूओं का नेतृत्व करें तो देखें गे के मानव ने कृषि की खोज की , कैसे जंगलों को काट कर कृषि योग्य भूमि को तैयार किया कृषि में नए नए बदलावों को महसूस किया

उस भूमि को उपजाऊ बनाया जहाँ बीजो को उगाना मुश्किल होता था। धरती और मिट्टी के साथ खुद का रिश्ता कायम किया और खुद को एक औधा दिया जिसका नाम है अन्न दातां यानि के किसान अगर आज किसान कृषि करना छोड़ दे तो क्या आपके घरों में अनाज आएगा मिले गी किसी को रोटी कैसे खाये गा कोई बना के पकवान आप खुद ही सोचों है के नहीं किसान हर एक मानव के जीवन का हिस्सा।

must read it प्राकृतिक साधन

बस इतना  कहना चाहूंगा। 

” अन्न  दातां  सुखी  भव: ”  

किसान है तो कृषि है कृषि है तो किसान है

जय हिंद

यहाँ भी देखे 

Hard work in the agriculture field

By | 29th October 2018
Hard work in the agriculture field

Hard work in the agriculture field | कठिन परिश्रम कृषि के क्षेत्र में मशीनी युग से पहले किसान को कठिन परिश्रम(Hard work) कर के खेत में से अनाज की प्राप्ति होती थी। दिन की तपती धूप में भारी गर्मी मेंं भी किसान पूरी मेहनत से पूरे परिवार के साथ खेत में काम करता था। दिन रात एक कर के सारी आपदाओं से लड़ के किसान अपने खेत में अनाज उगा पाता था।

तब जाकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। खेत जोतते वक्त बैलों के साथ-साथ खुद चलना बैलों को सही दिशा देना धूप हो या छांव कुछ नहीं देखता था पहले कठिन परिश्रम ही किसान के काम अहम भूमिका निभाता था। तो क्या होता है कठिन परिश्रम आइये जान लेते है इसके बारें में …..

Hard work in the agriculture field | क्या है कठिन परिश्रम?

Hard work | कठिन परिश्रम के दो प्रकार है शारीरिक और मानसिक

शारीरिक :- शारीरिक परिश्रम में हम अपने शारीरिक गति विधियों द्वारा अपने हाथों पैरों और उनसे जुडी मासपेशियों के द्वारा काम को करते है या फिर किसी भी गति विधि को करते है।

जैसे की कस्सी के द्वारा मिटी खोदना या उठाना , दरांती के द्वारा फसल की कटाई करना , कुल्हाड़ी के द्वारा किसी पेड़ या टहनी को काटना , बेलचे के द्वारा मिटटी भरना और कुऍं से पानी खींचना जैसे कार्यों को करने में हमारा शारीरिक परिश्रम लगता है। 

मानसिक :-मानसिक परिश्रम ऐसी प्रकिर्या होती है जिसमे हम मानसिक गति विधिओं द्वारा काम को पूरा करते है। इस प्रकार के कार्यों में हमें अपने दिमाग से सोचना होत्ता है और कार्य को करने के लिए दूसरे व्यक्ति को आदेश देना होता है।

मानसिक परिश्रम में हम मानसिक शक्ति का उपयोग करते हैं। जोकि शारीरिक शक्ति से बिलकुल अलग होती है। उदाहरण के तोर पे जैसे हम आज के इस मशीनी युग में रहने वाले इंसान है जहाँ रोबोट जैसी तकनीक का उपयोग किया जाता है ,एक रोबोट मानव की सोच का अनोखा तकनिकी प्रदर्शन है।

ये एक मशीन होती है जिसको इंसान आदेश देता है और रोबोट आदेशानुसार कार्य को पूरा करता है। मानसिक परिश्रम को आज के इस अत्याधुनिक युग में “स्मार्ट वर्क” का नाम भी दिया गया है। 

Why the farmer needs to do physical work | किसान को शारीरिक परिश्रम करने की ज़रूरत क्यों पड़ी

जैसा की हम यहाँ बात कर रहें है मशीनीकरण से पहले  किसान और कृषि के बारे में उस वक़्त किसान के पास तकनीकी साधनो का अभाव होने के कारण सब काम खुद ही करने पड़ते थे। हर जीव के लिए सबसे ज्यादा जरूरी काम है

भोजन जुटाना यही काम इंसान को भी करना होता है अपने और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए। कृषि भारत में बहुत सदियों पहले से की जा रही है जब इंसान ने फसल उगना तो सिख लिया था।

लेकिन बहुत समय बीत जाने पर भी काम करने की प्रकिर्या वही थी जो सदियों पहले से चली आ रही थी। थोड़े बहुत बदलाव जरूर किये गए लेकिन शारीरिक परिश्रम वहीँ का वहीँ था। तो कहते है के मरता क्या ना करता ऐसा ही कुछ किसान के साथ भी चला आ रहा था। 

इतना कठोर परिश्रम(Hard work) होने की सबसे पहली वजह है

Due to lack of technical tools | तकनिकी साधनो के आभावके कारण

किसान की शुरुआत कृषि के क्षेत्र में इतनी अच्छी नहीं थी जितनी आज है। आज का दौर कृषि क्षेत्र में क्रांति ला चूका है। तकनिकी साधनो का पूरा प्रचलन और प्रसार है। यहाँ तक के सरकार भी किसान के लिए नए नए उपकरण लेने के लिए ऋण योजनाए बनती है।

जिसका किसान पूरा लाभ उठाते है।लेकिन मशीनी युग से पहले किसी भी प्रकार की स्वचालित मशीनरी नहीं थी किसान के पास जिसको इस्तेमाल करके वो अपने कठोर परिश्रम में बदलाव ला सकता था। 

Different conditions of land | जमीन की स्थिति का भीन भीन प्रकार का होने के कारण

किसान के आगे ये भी एक बड़ी चुनौती थी की खेती करने के लिए जमीन का सुधार करना बहुत आवश्यक था। जमीन हर जगह एक जैसी नहीं होती थी ,कहीं पे बिलकुल सख्त तो कहीं पे पथरीली ,तो कहीं पे रेतीली कहीं से ऊँची तो कहीं पे नीची बहुत ही मेहनत लगती  थी

जमीन  सुधार करने के लिए सालों निकल जाते थे मिटटी को समतल करने में मिटटी को उपजाऊ बंनाने में। यहाँ भी किसान के पास कठिन परिश्रम से बचने की कोई विधि नहीं थी

Knowledge of metal | धातु का ज्ञान पूरा न होने के कारण

इंसान को खेती के लिए नए उपकरणों के साथ साथ धातु का ज्ञान होने की आवशयकता थी। धातु का ज्ञान पूरा न होने के कारण लोहे से बने औजार और कृषि यंत्रों का बहुत कम विकास कर पाया किसान ।

किसान को लकड़ी से बने औजारों के साथ ही कठिन परिश्रम करना पड़ता था। खेत की जुताई किसान बैलों के द्वारा चलने वाले उपकरण हल का प्रयोग किया जाता था जोकि पूरी तरह से लकड़ी का बना होता था। लोहे से बने हल के मुक़ाबले लकड़ी का हल मिटटी में कम धस्ता था।

जिसके कारण जुताई में भी कोई गहरा परिणाम नहीं मिलता था और परिश्रम अधिक करना पड़ता था। बैलों को सही दिशा दिखने के लिए और हल को पकड़ कर चलाने के लिए किसान को खुद भी बैलों की तरह ही कार्य को करना पड़ता था।

Dependence on natural resources | प्राकृतिक साधनो पे निर्भरता के कारण

किसान का सारा जीवन चक्र फसल के ऊपर निर्भर करता था और फसल का सारा जीवन चक्र प्रकृति पे निर्भर था। फसल उगाने के लिए किसान को मानसून का इंतजार करना पड़ता था।

मानसून आने से पहले खेत की जुताई कर देना और मानसून ना आने के कारण खेत में बीज की बुआई नहीं हो पाती थी अगली फसल के लिए खेत को फिर से त्यार करना पड़ता था जिसके कारण परिश्रम और अधिक कठिन बन जाता था। 

Lack of fertilizers | उर्वरकों का आभाव होने के कारण

अच्छी प्रकार से मिटटी की जुताई न होने के कारण हर फसल देने के बाद मिटटी की उपजाऊ शक्ति कम पड़ जाती थी। जिसको पूरा करने के लिए किसान पशु पालता था और उन पशुओं के मल के द्वारा त्यार खाद को खेत में डाल कर कुछ हद तक उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता था। इस सारी प्रकिया को करने में भी कठोर परिश्रम शामिल होता है।

Good variety of seeds | बीज का अच्छी किस्म का न होने के कारण

किसान कई बरसो से उन्ही बिज्जों का उपयोग करता आ रहा था बुआई के लिए जो वो हर बार बोता था। बीजों की किस्सम बहुत पुरानी होने के कारण उनमें भी परिवर्तन की जरूरत थी।

खेत में बुआई करने के बाद बहुत बार ऐसा होता था के किसान के द्वारा बोये गए बीज उपजे नहीं अंकुरित नहीं हुए। किसान फिर से मेहनत करके बीजों को खेत में बोया करता था जो की कठिन परिश्रम बन जाता था।

Family observance | सबसे ज्यादा जरूरी बात परिवार का पालन करने के कारण

किसान भी अन्य जीवों की तरह परिवार को बढ़ावा देने वाला जीव है जोकी परिवार और समूह में रह कर अपने जीवन में खुशियों का आनंद लेता है दुःख और सुख का अनुभव करता है।

एक बार परिवार बंनाने के बाद किसान के पास उस समय में सबसे बड़ी चुनौती थी पेट भरना और पेट भरने के लिए जरूरत होती है अनाज की जिसके लिए इंसान कठिन परिश्रम के साथ साथ संघर्ष भी करता था।

What did the farmer get from hard work

किसान को कठिन परिश्रम से क्या मिला

  • आपसी मेलजोल की भावना सब में थी क्यूंकि सब काम शारीरिक परिश्रम से होते थे और आपसी मेल जॉल से ये काम थोड़े सरल हो जातें थे सब एक दूसरे की जरूरतों को समझतें थे। 
  • इंसान एक दूसरे की परवाह करते थे।  
  • परिवारिक संबंध मजबूत होते थे। 
  •  बच्चों को माँ बाप के साथ साथ पूरे परिवार से प्यार मिलता था। 
  • बुजुर्ग लोगो का सम्मान होता था। बुजुर्ग भी अपने परिवार में सब के साथ मिल जूल कर रहतें थे। 
  • लोग बड़े दयालु थे सबके अंदर दया भावना थी। 
  • कठिन परिश्रम से किसान ने रोग मुक्त शरीर को प्राप्त किया। 

कठिन परिश्रम से किसान को ये सब मिला जो हमने आज खो दिया है।

आज का जो समय है इस समय में अधिकतर लोग मानसिक परिश्रम (स्मार्ट वर्क) से ही सब काम कर लेते हैं। आज के इस अत्याधुनिक युग में खास कर पैसे कमाने को लेकर ,खरीदारी को लेकर, यात्रा को लेकर और भी बहुत से काम है, जो आपके मानसिक परिश्रम से ही हो जाते है।

लेकिन इन सब चीज़ों से आपसी मेलजोल की भावना खतम होने की कगार पे है। पारिवारिक संबंध टूटतें जा रहे है सब कुछ टुकड़ों में बंट गया है। बच्चें माँ बाप से प्यार को तरशते हैं।  वृद्ध हो जाने पर तो मानो बुढ़ापा अभिशाप ही बन्न जाता है।

वृद्ध इंसान से कोई बात तक करना पसंद नहीं करता। दया नाम की तो कोई चीज़ रही ही नहीं है आज के इस युग में।

What is the disadvantage of hard work | कठिन परिश्रम में किसान का नुकसान क्या है

कठिन परिश्रम से किसी को कोई नुकसान नहीं होता है। अगर मेहनत करने वाले को ये पता हो के वो मेहनत सही दिशा में की जा रही है। 

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Conclusion-निष्कर्ष

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Farming before mechanization of agriculture in India

By | 29th October 2018
Farming before mechanization of agriculture in India

Farming before mechanization of agriculture in India | मशीनीकरण से पहले किसान खेती में सब काम शारीरिक मेहनत करके किया करता था। किसान खेत को फसल के लिए त्यार करने के लिए बैलो का उपयोग करता था। फसल उगाने का सही समय मॉनसून पर निर्भर करता था। इतना अनाज भी नहीं पैदा कर पता था किसान के अपने परिवार का ही पेट भर सके। हालत ये थे की अनाज बाहर से मंगाने को तैयार थे। लेकिन अनाज बाहर से भी तभी आता अगर किसान के पास अनाज खरीदने के लिए पर्यापत धन होता।

आप चाहें कहीं भी चलें जाएं खेती से जुड़ें पहलु हर जगह अपना महत्व बनाये हुए है। भारत का आजादी से पहले का कृषि का दौर कुछ ख़ास नहीं था। कृषि संसाधनों के अभाव के साथ साथ कृषि योग्य भूमि भी कम पड़ रही थी। लेकिन लोगो के भरण पोषण जा जरिया खेती ही था। अब कोई और चारा भी नहीं था लोगो के पास पेट भरने के लिए।

Farming before mechanization of agriculture in India
Farming before mechanization of agriculture in India

Farming before mechanization of agriculture in India

अनाज ले देकर काम चलाते थे

तो लोग एक दूसरे से अनाज ले देकर काम चलाते थे। प्राकृतिक साधनो पर किसान को निर्भर रहना पड़ता था। उस वक़्त ट्यूब वेल नहीं हुआ करते थे। मानसून का इंतजार करना पड़ता था बुआई के लिए। 

सूखा पद जाने पर मरने के हालात पैदा हो जातें थे इंसान तो क्या सूखा पड़ने पर जानवर भी मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे। जीवन बहुत कठिन था। कोई फसल चक्र भी नहीं बन पता था। खेत की जुताई के लिए लकड़ी के हल हुआ करते थे जिनको बैलो के द्वारा चलाया जाता था। हल से जमीन की जुताई गहराई तक नहीं हो पाती थी। जिसके कारन जमीन की उपजाऊ शक्ति कम थी।

फसल नस्ल अनुसंधान केंद्र उपलब्ध नहीं था – मशीनीकरण से पहले कृषि

किसान अपने द्वारा उगाये गए अनाज का ही उपयोग बीजो के लिए करता था। बीज अच्छी किसम के नहीं थे जिसके कारन पैदावार भी अच्छी नहीं होती थी। पूरा का पूरा जीवन चक्र खेती पर निर्भर करता था। फसल अच्छी तो जीवन में खुशहाली नहीं तो सब कुछ उदासी में बदल जाता था। किसान खेती के साथ साथ पशु भी पालता था और उनके मल से तैयार खात का उपयोग जमीन को उपजाऊ करने के लिए करता था जो की पर्यपत नहीं होती थी। धीरे धीरे फसल उगाने की धरती भी कम पड़ रही थी।

जमीन बंजर

किसान की जमीन बंजर होती जा रही थी। उस वक़्त रसायनिक उर्वरक नहीं थे। फसल उगने के बाद भी बहुत कड़ी मेहनत करनी होती थी। अच्छी खासी फसल में कीट लग जातें थे। किसान मित्र जीवों के द्वारा ही फसल की रक्षा कर पाता था जोकि प्रयाप्त नहीं था। बहुत बार तो ऐसा होता था अछि खासी फसल को किट तबाह कर देतें थे। प्राकृतिक आपदाएं भी बहुत थी जिनका किसान को सामना करना पड़ता था।

सबसे पहली आपदा तो किसान के लिए सूखा मौसम था।

एक किसान के लिए शुष्क मौसम आपदा कैसे थी

Farming before mechanization of agriculture in India
Farming before mechanization of agriculture in India

सूखा मौसम किसान के लिए अभिशाप बनके आता था। खून के आँशु रोता था किसान सूखा आने पर।

किसान के लिए सूखा पड़ने का मतलब मोत के साथ युद्ध करने बराबर था। क्युकी सूखे मौसम में किसान फसल नहीं उगा पता था और सब कुछ तो निर्भर करता था किसान के फसल के ऊपर। फसल न हुई तो अनाज कहाँ से आएगा किसान के परिवार को भूखा मरने पे मजबूर होना पड़ता था आर्थिक आमदनी का और कोई जरिया इतना ख़ास नहीं था की वो अपने परिवार का पेट भर सके नहीं उसके पास पर्यापत धन होता था के अनाज बाहर से खरीद के ला सके। 

सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती थी। 

सब मिल कर एक दूसरे के साथ अनाज बाँट कर प्रयास में लगे रहते थे के कोई भूखा ना रहे। सूखा पड़ने से किसान के पशु भी मर जाते थे। क्युकी उनके लिए भी चारा नहीं जुटता था। इसके अलावा आस पास उगी सब प्राकृतिक घास भी सूखे से नष्ट हो जाती थी। मानव ने पेट भरने के लिए एक सरल तरीका तो खोज लिया था अनाज को उगाना लेकिन ये पूरी तरह से निर्भर करता था प्राकृतिक साधनो पर और भी बहुत सी  विपदाएं थी जिनका किसान को सामना करना पड़ता था। बाढ़ जिनमे से एक है आइये जानलेते है के बाढ़ कैसे थी किसान के लिए आपदा।

किसान के लिए बाढ़ आपदा कैसे थी

Farming before mechanization of agriculture in India
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किसान के जीवन में खुशाली तब तक ही जब तक प्रकृति उसके साथ रहती। मगर जब प्रकृति किसान से मुँह मोड़ लेती थी तो किसान के ऊपर विपदाओं का पहाड़ टूट पड़ता था। फसल के लिए मानसून का इंतजार करते करते जब मानसून आते थे तो किसान मिलकर खुशियां मनाते थे गीत गाते थे लेकिन कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था के ये खुशिया कितनी बड़ी मुशीबत लेकर आने वाली है।

मानसून रुकने का नाम नहीं लेता था

जब मानसून रुकने का नाम नहीं लेता था तब बाढ़ आती थी बाढ़ मतलब किसान के नाम की एक और मुशीबत किसान के पास बहुत कम साधन उपलभ्द थे बाढ़ से बचने के लिए। बाढ़ से बचने के लिए किसान को ऊँचा स्थान खोजना पड़ता था। जो की बहुत कम जगह उपलब्ध होता था। बाढ़ आती थी और सब कुछ बहा के ले जाती थी किसान के मवेशी भी बाढ़ में बाह जाते थे।

All sick

पीछे रह जाता था तो वो होता था बीमारिया रोग जिनसे बाद के बचें हुए इंसान और पशु ग्रषित हो जातें था। बाढ़ चली जाती थी लेकिन एक नयी मुशीबत पीछे छोड़ जाती थी। बाढ़ के बाद जो भी पानी के साथ बहा के आता था मर्रे हुए जिव जंतु और बहुत सारा कचरा उन सब में दुर्गन्ध पैदा हो जाती थी वो सड़ने लगते थे। जिसके कारण बड़ी बड़ी बीमारियों का जन्म होता था।

प्लेग नाम की बीमारी

उस समय में प्लेग नाम की बीमारी का बहुत चलन होता था जो अक्सर पैदा हो जाया करती थी। सबसे महत्वपूर्ण अच्छी चिकित्षा का प्रबंध न होने के कारन बहुत से लोग मर जातें थे। प्लेग का रोग किसी को नहीं बक्शता था ये जिसको लग जाता था उसके बचने की उम्मीद बहुत कम हुआ करती थी।  जिसकी उम्मीद हुआ करती थी उसको अच्छी चिकित्षा की जरूरत हुआ करती थी जो की सिर्फ सहर में ही उपलब्ध हुआ करती थी। और सहर गाँव से कोषो मिल दूर हुआ करते थे। 

साधान उपलब्ध नहीं थे

सहर ले जाने के लिए साधान उपलब्ध नहीं थे। बैल गाडी का उपयोग किया जाता था आने जाने के लिए जो की आज की तुलना में बहुत ही धिम्मी गति का साधन हुआ करता था। किसी बीमार को सहर के लिए लेकर जाते तो वो सहर पहुंचते पहुंचते रास्ते में ही दम तोड़ देता था। बहुत ही कठोर जीवन था पहले किसान का जीवन के हर छोर पे एक नयी कठिनाई का सामना करता था किसान।

Must read it  प्राकृतिक साधन

Conclusion:-निष्कर्ष

Farming before mechanization of agriculture in India | मैंने यहाँ मशीनीकरण से पहले भारतीय किसान कैसे जीवन व्यतीत करता था। इन सब बातों पर ये लेख लिखा है। आपको ये लेख कैसा लगा जरूर बताये ।

“धन्यवाद”